हूल दिवस पर चंपाई सोरेन का सरकार पर हमला, बोले- भोगनाडीह को बना दिया पुलिस छावनी
रांची: हूल दिवस के अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा विधायक चंपाई सोरेन ने झारखंड सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि संथाल हूल की ऐतिहासिक धरती भोगनाडीह को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि हूल दिवस पर श्रद्धांजलि देने के लिए भी लोगों को अनुमति लेनी पड़ रही है और बॉन्ड भरने की शर्त लगाई गई है।
प्रमुख बातें
- हूल दिवस पर चंपाई सोरेन का सरकार पर हमला
- भोगनाडीह को पुलिस छावनी बनाने का आरोप
- 58 मजिस्ट्रेटों की तैनाती पर उठाए सवाल
- श्रद्धांजलि देने के लिए अनुमति और बॉन्ड की व्यवस्था की आलोचना
- वीर सिदो-कान्हू की विरासत से जुड़ा भावनात्मक बयान
भोगनाडीह को पुलिस छावनी बनाने का आरोप
चंपाई सोरेन ने सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में कहा कि हूल दिवस के दिन वीरभूमि भोगनाडीह को पुलिस छावनी में बदल दिया गया है। उन्होंने दावा किया कि वहां 58 मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति की गई है और हर कदम पर पुलिस की तैनाती की गई है।

“श्रद्धांजलि देने के लिए भी लेनी पड़ रही अनुमति”
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1855 में वीर सिदो मुर्मु, कान्हू मुर्मु, चांद मुर्मु, भैरव मुर्मु तथा वीरांगनाओं फूलो मुर्मु और झानो मुर्मु ने अंग्रेजी शासन के खिलाफ हूल आंदोलन का नेतृत्व किया था।
उन्होंने कहा कि उन वीरों ने कभी कल्पना भी नहीं की होगी कि आजादी के दशकों बाद उनके वंशजों और गांव के लोगों को उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए भी सरकार से अनुमति लेनी पड़ेगी और इसके लिए बॉन्ड भरना होगा।

सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
चंपाई सोरेन ने अपने बयान में सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सत्ता के अहंकार में सरकार यह भूल गई है कि देश अब न तो ब्रिटिश शासन के अधीन है और न ही राजतंत्र है।
उन्होंने यह भी कहा कि वीर सिदो-कान्हू की विरासत को मिटाने की कोशिश करने वालों को जनता उचित जवाब देगी।

हूल दिवस पर राजनीतिक बयानबाजी तेज
हूल दिवस के अवसर पर चंपाई सोरेन के इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। उनके आरोपों को लेकर अब सियासी प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू होने की संभावना है।
