एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड में अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आगाज
उभरते प्रबंधन अभ्यास और स्थिरता पर सामाजिक प्रभाव (ICMSIS’25) विषय पर दो दिवसीय चर्चा शुरू
मुख्य बिंदु:
सम्मेलन का उद्देश्य: प्रबंधन, स्थिरता और सामाजिक प्रभाव के बीच अंतःविषय संवाद को बढ़ावा
उद्घाटन समारोह में डॉ. प्रांजल लाहेनसिंह पाटिल और प्रो. उज्ज्वल के. चौधरी सहित प्रमुख वक्ता शामिल
जलवायु परिवर्तन, एआई, फिनटेक और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे समकालीन मुद्दों पर चर्चा
सम्मेलन के उद्देश्यों पर कुलपति की शुभकामनाएं
एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड द्वारा 26 जून 2025 को ICMSIS’25 (International Conference on Management Practices, Sustainability & Social Impact) नामक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत की गई। इस आयोजन का उद्देश्य आधुनिक प्रबंधन प्रथाओं और सामाजिक स्थिरता के संबंध पर गहन चर्चा को बढ़ावा देना है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अशोक के. श्रीवास्तव ने आयोजन के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं और इसे शैक्षणिक संवाद को वैश्विक प्राथमिकताओं से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।

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मुख्य अतिथियों ने दिए प्रेरणादायक संदेश
मुख्य अतिथि डॉ. प्रांजल लाहेनसिंह पाटिल (आईएएस) ने शिक्षा को सामाजिक सुधार का सबसे प्रभावी उपकरण बताते हुए कहा, “सामाजिक पतन को रोकने के लिए शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है।” उन्होंने स्थिरता को शिक्षा प्रणाली में समावेशित करने की जरूरत पर बल दिया।

दूसरे मुख्य अतिथि प्रो. उज्ज्वल के. चौधरी, वाशिंगटन यूनिवर्सिटी, वर्जीनिया, यूएसए के ग्लोबल मार्केटिंग और इंटरनेशनल रिलेशन के वाइस प्रेसिडेंट हैं। उन्होंने कहा, “स्थिरता अब विषय नहीं, जीवन शैली बननी चाहिए। जैसे एआई अब जीवन का हिस्सा बन गया है, उसी तरह सततता भी रोज़मर्रा का हिस्सा होनी चाहिए।”
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अस्थिर विश्व में स्थिरता की दिशा में कदम: आइरीन मैनिंग का संदेश
1M1B फाउंडेशन की प्रोग्राम मैनेजर श्रीमती आइरीन पेट्रीसिया मैनिंग ने कहा, “हम एक अस्थिर दुनिया में हैं जहाँ जलवायु परिवर्तन, सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव और इंटरनेट की चुनौतियाँ हैं।” उन्होंने विशेष रूप से सक्षम बच्चों के लिए एआई और स्थिरता को जोड़ने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि बेहतर भविष्य के लिए हमें आज से बदलाव शुरू करना होगा।

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तकनीकी सत्रों में विविध विषयों पर शोध पत्र प्रस्तुत
सम्मेलन के दौरान विभिन्न तकनीकी सत्रों में शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। चर्चा के मुख्य विषयों में शामिल रहे:
डिजिटल हस्तक्षेप और भाषा शिक्षा
कार्य का भविष्य और कार्यबल परिवर्तन
फिनटेक बनाम पारंपरिक वित्तीय मॉडल
व्यापार और कूटनीति में फ्रेंच भाषा की भूमिका
आधुनिक विपणन रणनीतियों में डिजिटल परिवर्तन
ऑपरेशनल मैनेजमेंट, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन का भविष्य

इन सत्रों में प्रस्तुत शोध पत्रों ने न केवल अकादमिक दृष्टिकोण से बल्कि उद्योग और नीति निर्माण के दृष्टिकोण से भी सम्मेलन को समृद्ध किया।
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नवाचार और सहयोग की ओर कदम
सम्मेलन ने यह स्पष्ट किया कि उभरती प्रबंधन प्रथाएं केवल मुनाफा आधारित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के साथ भी जोड़ा जाना चाहिए। वक्ताओं ने सहयोग, नवाचार और डिजिटल सशक्तिकरण के जरिए एक स्थायी भविष्य की दिशा में बढ़ने का आह्वान किया।
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एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड का यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “ICMSIS’25” सिर्फ शैक्षणिक आयोजन नहीं बल्कि एक सोच को दिशा देने का प्रयास है। इसमें विचारों का आदान-प्रदान हुआ जो आने वाले समय में प्रबंधन, शिक्षा और सामाजिक सुधार की नई संभावनाओं के द्वार खोल सकता है।
