कुणाल षाडंगी का जनहित संदेश या राजनीतिक तंज? JMM प्रवक्ता का बयान चर्चा में
मुख्य बिंदु:
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JMM प्रवक्ता कुणाल षाडंगी ने “पागल कुत्ते को मारना अपराध है” कहते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट किया
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कानूनी प्रावधानों के साथ बयान में जोड़ा गया तीखा राजनीतिक व्यंग्य
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घाटशिला उपचुनाव से पहले बयान को विपक्ष पर निशाने के तौर पर देखा जा रहा है
रांची
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के प्रवक्ता कुणाल षाडंगी का एक सोशल मीडिया पोस्ट राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। उन्होंने “पागल कुत्ते को मारना कानूनन अपराध है” शीर्षक से एक जनहित संदेश साझा किया, जिसमें कानून का हवाला तो है, लेकिन अंत में जोड़ी गई राजनीतिक टिप्पणी ने पूरे पोस्ट को सियासी रंग दे दिया है।
कानूनी जानकारी के साथ तीखा तंज
अपने पोस्ट में कुणाल षाडंगी ने जानवरों के प्रति क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 और पशु जन्म नियंत्रण नियम, 2001 का हवाला देते हुए लिखा कि किसी भी “पागल कुत्ते” को मारना गैरकानूनी है और ऐसा केवल एक योग्य पशुचिकित्सक ही सरकारी नियमों के तहत कर सकता है।
हालांकि पोस्ट के अंत में उन्होंने लिखा —
“वैधानिक चेतावनी: सभी पात्र काल्पनिक हैं। इस सूचना का पिछले विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार पीट चुके या आने वाले घाटशिला उपचुनाव में फिर से निश्चित हार को देखते हुए बौखलाए कुछ अधेड़ किस्म के फूँके हुए कारतूसों से जीवित या मृत कोई संबंध नहीं है।”
यह पंक्ति स्पष्ट रूप से राजनीतिक व्यंग्य का रूप ले लेती है, जिसे विपक्ष पर “तंज” के रूप में देखा जा रहा है।
घाटशिला उपचुनाव की पृष्ठभूमि में बयान
यह बयान ऐसे समय आया है जब घाटशिला विधानसभा सीट पर उपचुनाव की तैयारियाँ तेज हैं। JMM और भाजपा, दोनों पार्टियाँ वहां पूरी ताकत झोंक रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कुणाल षाडंगी का यह बयान न सिर्फ “जनहित संदेश” है, बल्कि विपक्षी नेताओं की लगातार आलोचना और “बौखलाहट” पर अप्रत्यक्ष वार भी है।
विपक्षी खेमे में हलचल
JMM प्रवक्ता के इस पोस्ट के बाद विपक्षी खेमे में हलचल मच गई है। कुछ भाजपा समर्थकों ने इसे “राजनीतिक बचाव” करार दिया है, जबकि JMM समर्थक इसे “व्यंग्य में छिपा सटीक जवाब” बता रहे हैं।
सोशल मीडिया पर चर्चा तेज
कुणाल षाडंगी का यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है। कई उपयोगकर्ताओं ने उनके तंज को “राजनीतिक व्यंग्य की कला” बताया, जबकि कुछ ने जनहित और राजनीति को एक साथ मिलाने की आलोचना की।
कुणाल षाडंगी का यह बयान दो स्तरों पर असर डाल रहा है — एक तरफ यह कानून की जानकारी देता है, दूसरी तरफ घाटशिला उपचुनाव से पहले विपक्ष पर तीखा हमला भी करता है। जाहिर है, JMM अब सोशल मीडिया पर भी राजनीतिक रणनीति के नए तरीके आजमा रहा है।
