हेमंत सरकार पर निशाना: अमर कुमार बाउरी ने की आलोचना
भाजपा के नेता प्रतिपक्ष अमर कुमार बाउरी ने 27 सितंबर को प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में हेमंत सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इस सरकार के कार्यकाल में देश की संप्रभुता को खतरा है। बाउरी के अनुसार, अदालत ने भी राज्य सरकार को “फ्रॉड” करार दिया है, जो भाजपा द्वारा पहले से ही लगाए गए आरोपों की पुष्टि करता है।
नौकरियों के नाम पर धोखा
अमर कुमार बाउरी ने हेमंत सरकार पर आरोप लगाया कि उन्होंने 2019 में जनता को धोखा देकर सरकार बनाई थी। उन्होंने युवाओं को हर साल 5 लाख नौकरियां देने का वादा किया, लेकिन यह वादा कभी पूरा नहीं हुआ। हाल ही में आयोजित सीजीएल-जेएसएससी परीक्षा के संदर्भ में भी उन्होंने सरकार पर कई सवाल उठाए।
इंटरनेट बंद और परीक्षा का सवाल
बाउरी ने कहा कि सीजीएल-जेएसएससी परीक्षा के दौरान सरकार ने पूरे राज्य का इंटरनेट बंद कर दिया, जो जनता के लिए परेशानी का कारण बना। असम सरकार के उदाहरण का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि इंटरनेट बंद करने के लिए सरकार ने पहले से उचित सूचना नहीं दी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार कुछ छिपाने की कोशिश कर रही थी।
परीक्षा में धांधली और प्रश्नपत्र लीक का आरोप
बाउरी ने आरोप लगाया कि परीक्षा से पहले ही आंसर शीट लीक हो गई थी और इसके प्रमाण भी हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों ने इस गड़बड़ी के वीडियो भी बनाए हैं। भाजपा ने छात्रों के साथ खड़े रहने का वादा किया और कहा कि गड़बड़ी करने वाले को कोई भी बचा नहीं सकता।
जेएसएससी और सरकार पर सवाल
अमर कुमार बाउरी ने जेएसएससी के चेयरमैन के बयान की आलोचना की, जिसमें कहा गया था कि अगर गड़बड़ी हुई है तो सबूत पेश किए जाएं। बाउरी ने कहा कि छात्रों ने जेएसएससी के सामने सारे पुख्ता सबूत पेश किए हैं और सरकार अब भी इस मुद्दे को दबाने की कोशिश कर रही है।
छात्रों को धमकाने का आरोप
बाउरी ने कहा कि जो छात्र इस गड़बड़ी के खिलाफ खड़े हो रहे हैं, उन्हें धमकियां मिल रही हैं। अगर किसी भी छात्र को कोई नुकसान होता है तो इसके लिए सीधा मुख्यमंत्री और उनकी पार्टी जिम्मेदार होगी। उन्होंने कहा कि सरकार नौकरियां बेचने का काम कर रही है और यह जनता के साथ धोखा है।
मुख्यमंत्री से जवाब की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले पर जवाब देने की मांग की। उन्होंने कहा कि जेएसएससी के दोषी पदाधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, चाहे वे कितने ही बड़े पद पर क्यों न हों।
