सरना धर्म कोड बनाम सिरमटोली रैंप: आदिवासी नेताओं का फूटा गुस्सा
मुख्यमंत्री पर आदिवासी संगठनों का तीखा हमला | कांग्रेस नेत्री बोलीं – पहले माटी, फिर पार्टी | 4 जून को झारखंड बंद प्रस्तावित.
✅ प्रमुख बिंदु
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सरना धर्म कोड की मांग को लेकर कांग्रेस-झामुमो केंद्र पर हमलावर
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रांची में सिरमटोली फ्लाईओवर के रैंप को लेकर आदिवासी संगठनों का विरोध
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कांग्रेस की आदिवासी नेत्री गीताश्री बोलीं – “मुख्यमंत्री कर रहे हैं मनमानी”
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प्रेमशाही मुंडा ने हेमंत सरकार को बताया “आदिवासी विरोधी”
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4 जून को झारखंड बंद करने की तैयारी
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आदिवासी संगठनों में गहरी नाराजगी, दोहरे रवैये पर उठे सवाल
🌾 सरना धर्म कोड की मांग और सरकार का रुख
झारखंड की सत्ताधारी पार्टियाँ—कांग्रेस और झामुमो—इन दिनों केंद्र सरकार पर सरना धर्म कोड को लेकर दबाव बना रही हैं। राज्यभर में धरना-प्रदर्शन और रैलियाँ आयोजित की जा रही हैं। आदिवासी समाज को धार्मिक पहचान दिलाने की यह वर्षों पुरानी मांग अब एक बार फिर केंद्रबिंदु में है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता इस मुद्दे को लेकर लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। सरकार का दावा है कि वह आदिवासियों की संस्कृति, परंपरा और धार्मिक पहचान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन इसी के समानांतर सरकार के ही कुछ निर्णयों ने आदिवासी संगठनों और नेताओं को नाराज कर दिया है।
🛑 सिरमटोली रैंप को लेकर बढ़ा विरोध
जहां एक तरफ सरना धर्म कोड की आवाजें बुलंद की जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर रांची के सिरमटोली फ्लाइओवर के रैंप को लेकर आदिवासी समुदाय में आक्रोश है। उनका कहना है कि यह रैंप पारंपरिक आदिवासी क्षेत्र में बना है और इसके कारण धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों को नुकसान पहुंचा है।
प्रेमशाही मुंडा, जो आदिवासी समाज के प्रमुख नेताओं में से हैं, ने सरकार पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा,
“हेमंत सोरेन सरकार को अब आदिवासियों के मुद्दों पर बोलने का कोई हक नहीं। एक तरफ आदिवासी परेशान हैं, दूसरी तरफ सरकार कोड की मांग कर रही है। ये ढोंग है।”
https://youtu.be/uuL4upE6KdI
उनका कहना है कि अब आदिवासी जाग चुके हैं और वे अपने अधिकारों को लेकर सजग हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं, तो आने वाले समय में इसका जवाब जनता देगी।
गीताश्री उरांव का बड़ा बयान: “पहले माटी, फिर पार्टी”
कांग्रेस की आदिवासी नेत्री गीताश्री उरांव ने भी पार्टी लाइन से हटकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा,
“मेरे लिए पहले माटी है, फिर पार्टी। मैं जो आंदोलन कर रही हूं, वो किसी दल के लिए नहीं, अपने समुदाय के लिए है।”
उन्होंने बताया कि उन्होंने अपनी सारी बात कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी को बता दी है। गीताश्री ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर “मनमानी” करने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार जमीनी मुद्दों को नजरअंदाज कर रही है।
यह भी आरोप लगा कि गीताश्री की गतिविधियाँ भाजपा के साथ मिलीभगत की ओर इशारा करती हैं, जिसे उन्होंने सिरे से नकार दिया। उन्होंने कहा, “सच बोलना भाजपा के साथ जाना नहीं है। मैं सिर्फ अपने लोगों के साथ खड़ी हूं।”
📢 4 जून को झारखंड बंद प्रस्तावित, बढ़ेगा राजनीतिक तापमान
इन सभी घटनाओं के बीच आदिवासी संगठन 4 जून को झारखंड बंद करने की तैयारी में हैं। हालांकि, आधिकारिक घोषणा होना बाकी है। इससे पहले मंगलवार को रांची में जोरदार प्रदर्शन भी हुआ। धरना स्थल पर मौजूद नेताओं और संगठनों ने साफ कहा कि अगर सरकार ने सिरमटोली रैंप नहीं हटाया, तो वे आंदोलन तेज करेंगे।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राज्य सरकार की कथनी और करनी में बड़ा फर्क है। वे सरना धर्म कोड की बात तो करते हैं, लेकिन जमीन पर आदिवासी हितों की रक्षा नहीं करते।
🔍 क्या सरकार दोहरी राजनीति कर रही है?
सरना धर्म कोड की मांग पर केंद्र के खिलाफ विरोध जताना और दूसरी ओर आदिवासी क्षेत्रों में विकास योजनाओं के नाम पर “जबरदस्ती”—इस दोहरी नीति को लेकर अब राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ गई है।
आदिवासी नेता और सामाजिक संगठन अब खुलकर सवाल कर रहे हैं कि क्या यह सब सिर्फ चुनावी रणनीति है? क्या सरकार वास्तव में आदिवासी हितों को लेकर गंभीर है?
इस पूरे घटनाक्रम ने झारखंड की सियासत को गरमा दिया है। एक तरफ सरकार खुद को आदिवासी हितैषी साबित करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर उसी सरकार के खिलाफ आदिवासी नेता और संगठन सड़कों पर उतर चुके हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि सरकार इस संकट को कैसे संभालती है और क्या वाकई आदिवासी हित सर्वोपरि रहेंगे, या फिर यह भी एक राजनीतिक अवसर भर बनकर रह जाएगा।
