परीक्षा में देरी से नाराज़ छात्र-छात्राओं का घेराव, 10 जुलाई तक मांगें नहीं मानी गईं तो तालाबंदी की चेतावनी
मुख्य बिंदु:
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वोकेशनल और नर्सिंग कोर्स की परीक्षा में लंबे समय से हो रही देरी
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सत्र 2022-25 की परीक्षा अब तक नहीं, छात्र भयंकर आक्रोश में
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परीक्षा नियंत्रक विकास कुमार का यूथ कांग्रेस के नेतृत्व में घेराव
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10 जुलाई तक परिणाम व नोटिफिकेशन जारी करने का मिला आश्वासन
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मांगें नहीं मानी गईं तो परीक्षा विभाग में तालाबंदी की चेतावनी
वोकेशनल और नर्सिंग छात्रों की नाराज़गी फूटी, परीक्षा नियंत्रक का घेराव
रांची विश्वविद्यालय से संबद्ध वोकेशनल और नर्सिंग कॉलेजों के छात्र-छात्राओं ने परीक्षा में हो रही देरी के विरोध में सोमवार को परीक्षा नियंत्रक विकास कुमार का घेराव किया। यह विरोध युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष कुमार रोशन के नेतृत्व में किया गया। छात्रों का आरोप था कि परीक्षा में लगातार देरी से उनका सत्र लगभग 1 से 1.5 साल तक पिछड़ चुका है, जिससे उनका करियर खतरे में है।
सत्र 2022–25: अब तक नहीं हुई 5वीं सेमेस्टर की परीक्षा
छात्रों का कहना है कि बायोटेक्नोलॉजी सहित अन्य वोकेशनल कोर्स के सत्र 2022–25 के 5वें सेमेस्टर की परीक्षा अब तक आयोजित नहीं हुई है। यह देरी अगर आगे भी जारी रही, तो सत्र 1.5 साल तक पिछड़ सकता है। वहीं, पोस्ट बेसिक नर्सिंग सत्र 2022–24 के प्रथम वर्ष का परिणाम अब तक जारी नहीं किया गया, और दूसरा वर्ष भी शुरू नहीं हो पाया है।
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परीक्षा नियंत्रक ने कर्मचारियों की कमी को बताया वजह
युवा कांग्रेस नेता कुमार रोशन ने जब परीक्षा नियंत्रक से कारण पूछा, तो विकास कुमार ने कर्मचारियों की कमी को प्रमुख वजह बताया। उन्होंने छात्रों को भरोसा दिलाया कि:
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2022–24 पोस्ट बेसिक नर्सिंग का रिजल्ट आज या कल तक जारी कर दिया जाएगा
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10 जुलाई तक सप्लीमेंट्री फॉर्म भरने का नोटिस जारी किया जाएगा
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वोकेशनल कोर्स की 5वीं सेमेस्टर परीक्षा की अधिसूचना भी 10 जुलाई तक जारी होगी
10 जुलाई की डेडलाइन, नहीं मानी गई मांगें तो तालाबंदी
आंदोलन को समाप्त करते हुए यूथ कांग्रेस उपाध्यक्ष कुमार रोशन ने साफ कहा कि यदि 10 जुलाई तक सभी आश्वासनों पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो परीक्षा विभाग में तालाबंदी की जाएगी। इस मौके पर डॉ. पी नैय्यर, जो कांग्रेस नेता भी हैं, ने कहा कि “छात्रों का सत्र लेट होना उनके हक का हनन है, जिसे किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
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छात्रों के लिए गंभीर संकट बनती देरी
इस पूरे घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि विश्वविद्यालय की लापरवाही और प्रशासनिक सुस्ती का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है। अगर वादा किए गए समय सीमा तक समस्याओं का हल नहीं हुआ, तो यह विरोध और तीखा रूप ले सकता है।
