“कफन बांधकर घेरेंगे CM House!” – वित्त रहित शिक्षकों का बड़ा ऐलान, Jharkhand में बवाल

झारखंड/बिहार रोज़गार समाचार

मुख्य बिंदु
अनुदान वितरण में गड़बड़ी के आरोप पर रांची में महा धरना
हजारों शिक्षक-कर्मचारी सड़कों पर उतरे
राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, जांच की मांग
13, 16 और 20 अप्रैल को बड़े आंदोलन की चेतावनी

रांची में वित्त रहित शिक्षकों का महा धरना, अनुदान गड़बड़ी पर सरकार घिरी

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रांची। झारखंड में वित्त रहित शिक्षा व्यवस्था से जुड़े शिक्षक-कर्मचारियों ने अनुदान वितरण में कथित गड़बड़ी और दोहरे मापदंड के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा के बैनर तले लोक भवन के सामने विशाल महा धरना आयोजित किया गया, जिसमें राज्यभर से हजारों शिक्षक और कर्मचारी शामिल हुए।

धरना में गुमला, खूंटी, लोहरदगा, सिमडेगा और रांची समेत कई जिलों से बड़ी संख्या में शिक्षक पहुंचे। संस्कृत शिक्षक पीले वस्त्र और गमछा पहनकर विरोध जताते दिखे, जबकि मदरसा शिक्षकों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही। भीड़ इतनी अधिक थी कि धरना स्थल पर जगह कम पड़ गई।

अनुदान वितरण में दोहरे मापदंड का आरोप
मोर्चा ने आरोप लगाया कि अनुदान समिति द्वारा गंभीर गड़बड़ी की गई है। कुछ स्कूलों और कॉलेजों को परिवाद पत्र मिलने के बावजूद बिना जांच के अनुदान दे दिया गया, जबकि 158 संस्थानों का अनुदान कथित साजिश के तहत रोक दिया गया।
मोर्चा ने यह भी मांग की है कि 75 प्रतिशत अनुदान बढ़ोतरी के प्रस्ताव को विभाग से मंगाकर कैबिनेट से मंजूरी दिलाई जाए।

राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन, जांच की मांग
धरना के बाद पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में गणेश महतो, अरविंद सिंह, देवनाथ सिंह, फजलुल कदीर अहमद और अनिल तिवारी शामिल थे।
ज्ञापन में मुख्य सचिव से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही कहा गया कि राजनीतिक दबाव में अनुदान वितरण में भेदभाव हुआ है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।

“चार लाख बच्चों की शिक्षा पर संकट”
धरना को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि राज्य में चार लाख से अधिक बच्चों को वित्त रहित शिक्षक पढ़ा रहे हैं, लेकिन उन्हें वेतन के नाम पर कुछ नहीं मिलता। साल में मिलने वाला एकमात्र अनुदान भी अब काट दिया गया है।
मोर्चा का दावा है कि राज्य में करीब 1250 वित्त रहित संस्थान हैं, जहां 10 हजार से अधिक शिक्षक-कर्मचारी ग्रामीण और गरीब बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं।

आंदोलन तेज करने का ऐलान
धरना के दौरान हुई बैठक में आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से तेज करने का निर्णय लिया गया।
13 अप्रैल को मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और शिक्षा सचिव को ज्ञापन दिया जाएगा

16 अप्रैल को राज्यभर में विधायकों का घेराव होगा
20 अप्रैल को रांची में बैठक कर मुख्यमंत्री आवास घेराव की तिथि तय की जाएगी
25 अप्रैल को प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, शिक्षा मंत्री और राहुल गांधी को पत्र भेजा जाएगा
मोर्चा ने स्पष्ट कहा कि जब तक सभी प्रभावित संस्थानों को अनुदान नहीं मिल जाता और गड़बड़ी की जांच नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

“कफन बांधकर सीएम आवास घेरेंगे”
धरना के दौरान शिक्षकों ने चेतावनी दी कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो वे कफन बांधकर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे।
धरना की अध्यक्षता चंदेश्वर पाठक ने की, जबकि संचालन गणेश महतो ने किया। बैठक में कई जिलों के शिक्षक नेता और बड़ी संख्या में शिक्षक-कर्मचारी उपस्थित रहे।

निष्कर्ष
वित्त रहित शिक्षकों का यह आंदोलन अब सिर्फ अनुदान का मुद्दा नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और रोजगार सुरक्षा से जुड़ा बड़ा सवाल बनता जा रहा है। सरकार के लिए यह चुनौती है कि वह जल्द समाधान निकाले, अन्यथा आने वाले दिनों में यह आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।

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