कांग्रेस ने अंबेडकर की जयंती पर मानव श्रृंखला कार्यक्रम आयोजित किया।

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भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर कांग्रेस ने मानव श्रृंखला बनाकर किया संविधान रक्षा का संकल्प

मुख्य बिंदु-

  1. कांग्रेस ने डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर मानव श्रृंखला कार्यक्रम आयोजित किया

  2. मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कार्यक्रम में भाग लिया और संविधान की रक्षा का संदेश दिया

  3. कांग्रेस नेताओं के नेतृत्व में अंबेडकर चौक से राजेंद्र चौक तक मानव श्रृंखला बनाई गई

  4. मंत्री शिल्पी तिर्की ने संविधान को बचाने के लिए एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की

  5. तिर्की ने राजनीतिक दोगलेपन पर आलोचना करते हुए राज्य में एससी/एसटी और अन्य समुदायों के अधिकारों पर हमलों की बात की

  6. कांग्रेस द्वारा संविधान रक्षा पर आकर्षक झांकी निकाली गई, जिसका नेतृत्व पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने किया



कांग्रेस के मानव श्रृंखला कार्यक्रम में मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने जताई एकजुटता की जरूरत

रांची, 14 अप्रैल 2025: भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 135वीं जयंती के अवसर पर झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने रांची में एक विशेष “मानव श्रृंखला कार्यक्रम” का आयोजन किया। यह कार्यक्रम अंबेडकर चौक से लेकर राजेंद्र चौक तक आयोजित हुआ, जिसमें हजारों कार्यकर्ता हाथ में संविधान लेकर डॉ. अंबेडकर के योगदान को याद करते हुए संविधान रक्षा का संकल्प लेते नजर आए।

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राज्य की कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की इस कार्यक्रम में विशेष रूप से शामिल हुईं। उनके साथ कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के. राजू, प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी कार्यकर्ताओं के हाथों में संविधान की प्रतियां थीं और सभी ने एक स्वर में “जय भीम” के नारे लगाए।

संविधान को जोड़ने और बचाने का संदेश

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा, “कांग्रेस के मानव श्रृंखला कार्यक्रम ने संविधान को जोड़ने का एक सशक्त संदेश दिया है। आज के समय में जब संविधान पर बार-बार हमले हो रहे हैं, ऐसे में इस तरह की एकजुटता बेहद जरूरी है। हमें हाथ में संविधान और मन में अधिकार की भावना लेकर आगे बढ़ना होगा।”

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उन्होंने कहा कि संविधान डॉ. अंबेडकर की सोच और संघर्ष का परिणाम है, जिसने समाज के कमजोर वर्गों को अधिकार और सम्मान दिलाया। आज जब इन अधिकारों को खत्म करने की कोशिश हो रही है, तब हमें जागरूक और एकजुट होने की आवश्यकता है।

राजनीति में दिखावे का विरोध

शिल्पी नेहा तिर्की ने अपने संबोधन में राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि आज वे लोग भी जय भीम के नारे लगा रहे हैं, जो कल तक अपने संगठन कार्यालयों में तिरंगा फहराने से भी परहेज करते थे। उन्होंने इसे राजनीतिक दिखावा बताया और जनता से ऐसी राजनीति को पहचानने की अपील की।

उन्होंने कहा, “सिर्फ प्रतीकात्मक श्रद्धांजलि देने से काम नहीं चलेगा, हमें बाबा साहब के विचारों को आत्मसात करना होगा और उन्हें व्यवहार में लाना होगा।”

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कांग्रेस द्वारा संविधान रक्षा पर आकर्षक झांकी निकाली गई

SC/ST, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के अधिकारों पर हो रहे हमले

मंत्री ने यह भी कहा कि आज झारखंड सहित पूरे देश में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के संवैधानिक अधिकारों पर हमले हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इन समुदायों को संविधान के तहत मिले अधिकारों को खत्म करने की साजिशें रची जा रही हैं।

उन्होंने कहा, “हम सबका कर्तव्य है कि इन साजिशों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज बुलंद करें। संविधान की रक्षा हमारा नैतिक और राष्ट्रीय दायित्व है।”

आकर्षक झांकी बनी आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम में संविधान और डॉ. अंबेडकर के जीवन पर आधारित एक भव्य झांकी भी निकाली गई। इस झांकी का नेतृत्व कांग्रेस के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने किया। झांकी में अंबेडकर के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं को कलात्मक रूप से दर्शाया गया था। मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने भी इस झांकी में भाग लिया और लोगों से संवाद करते हुए उन्हें संविधान के महत्व की जानकारी दी।

कार्यकर्ताओं में जोश और एकजुटता

मानव श्रृंखला में शामिल कांग्रेस कार्यकर्ताओं में विशेष जोश और एकजुटता देखने को मिली। सभी ने यह संकल्प लिया कि वे डॉ. अंबेडकर के दिखाए मार्ग पर चलते हुए सामाजिक न्याय, समता और समान अधिकार के लिए संघर्षरत रहेंगे।

प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने कहा कि संविधान की मूल भावना को बचाए रखने के लिए ऐसे कार्यक्रमों की निरंतर आवश्यकता है। इस अवसर पर रांची के साथ-साथ राज्य के अन्य जिलों में भी अंबेडकर जयंती पर विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए।

संविधान ही राष्ट्र की आत्मा

अंत में, मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि संविधान सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि राष्ट्र की आत्मा है। इसे जीवित रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे गांव-गांव जाकर लोगों को संविधान की जानकारी दें और बाबा साहब के विचारों को जन-जन तक पहुंचाएं।

यह आयोजन डॉ. भीमराव अंबेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि के रूप में देखा जा रहा है, जिसने संविधान के प्रति नई ऊर्जा और प्रतिबद्धता को जन्म दिया है।

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