9 दिसंबर को विधानसभा के सामने वित्त रहित शिक्षकों का महाधरना.

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राज्यकर्मी दर्जा और अनुदान वृद्धि की मांग तेज, वित्त रहित मोर्चा 9 दिसंबर को करेगा प्रदर्शन

रांची। वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने अपनी लंबित मांगों को लेकर 09 दिसंबर 2025 को नए विधानसभा भवन के सामने एकदिवसीय महाधरना का ऐलान किया है। इस धरने में राज्य के इंटर कॉलेज, उच्च विद्यालय, संस्कृत विद्यालय और मदरसा विद्यालयों के प्राचार्य, प्रधानाचार्य, शिक्षक प्रतिनिधि और संगठन के पदाधिकारी बड़ी संख्या में शामिल होंगे। मोर्चा ने सभी शिक्षकों से निर्धारित तिथि पर अधिकाधिक संख्या में रांची पहुंचने की अपील की है।

धरना सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगा। मोर्चा ने कहा कि वर्तमान विधानसभा सत्र चार दिवसीय है जिसमें प्रदर्शन की संभावना सीमित है, इसलिए संगठन ने 9 दिसंबर को ही अपनी मांगों को जोरदार तरीके से उठाने का निर्णय लिया है।

मुख्य मांगें

मोर्चा ने सरकार के समक्ष पांच प्रमुख मांगें रखी हैं—
• 75% अनुदान वृद्धि का प्रस्ताव तत्काल कैबिनेट में लाया जाए।
• वित्त रहित शिक्षकों को राज्यकर्मी का दर्जा देने हेतु नियमावली की अटकी प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए।
• राज्य की बालिकाओं के लिए सावित्रीबाई फुले योजना का पोर्टल अविलंब खोला जाए।
• मैट्रिक व इंटर परीक्षा 2025 के फॉर्म भरने में पेन की अनिवार्यता को शिथिल किया जाए।
• संगठन की अन्य लंबित मांगों पर शीघ्र निर्णय लिया जाए।

मोर्चा के पदाधिकारियों ने कहा कि उनकी मांगें लंबे समय से सरकार के पास विचाराधीन हैं, लेकिन ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा है, जिससे शिक्षकों में भारी असंतोष है।

शिक्षकों से अपील

संघर्ष मोर्चा ने सभी संस्थानों से अधिकतम संख्या में शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने की अपील करते हुए कहा कि एकजुटता के माध्यम से ही उनकी समस्याओं का समाधान संभव है। संगठन ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन शिक्षकों के अधिकारों और सम्मान से जुड़े मुद्दों को लेकर है, इसलिए सामूहिक भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

महाधरना के आयोजन की जानकारी मोर्चा की ओर से कुंदन कुमार सिंह, रघुनाथ सिंह, हरिहर प्रसाद कुशवाहा, फजलुल कादरी अहमद, अरविंद सिंह, चंदेश्वर पाठक, देवनाथ सिंह, मनीष कुमार, गणेश महतो, संजय कुमार, विरसो उरांव, रेशमा बैक, पशुपति महतो, नरोत्तम सिंह, अनिल तिवारी, रघु विश्वकर्मा और अन्य पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से दी।

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