झारखंड में सबसे बड़ी समस्या बेरोज़गारी: 74% लोगों ने सर्वे में जताई चिंता।

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झारखंड की सबसे बड़ी समस्या क्या है? लोगों के सर्वे में सामने आई जनता की प्राथमिकता: बेरोज़गारी सबसे बड़ा संकट

मुख्य बिंदु:

  1. 74% लोगों ने बेरोज़गारी को राज्य की सबसे बड़ी समस्या बताया

  2. नक्सलवाद और कानून व्यवस्था को मात्र 2% लोगों ने प्रमुख मुद्दा माना

  3. 14% ने आदिवासी अधिकार और विस्थापन को अहम माना

  4. 10% लोगों ने भ्रष्टाचार को चिन्हित किया



जनता की प्राथमिकता साफ: बेरोज़गारी सबसे बड़ा मुद्दा

झारखंड में रोजगार की स्थिति कितनी भयावह है, इसका अंदाजा एक यूट्यूब सर्वे के नतीजों से लगाया जा सकता है। 148 प्रतिभागियों के साथ किए गए इस पोल में 74% लोगों ने बेरोज़गारी और रोज़गार संकट को राज्य का सबसे बड़ा मुद्दा बताया। यह आंकड़ा साफ दर्शाता है कि सरकार की योजनाएं, घोषणाएं और दावों के बावजूद आम जनता को रोज़गार की तलाश में संघर्ष करना पड़ रहा है।

यह सर्वे न केवल जनता की सोच को सामने लाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि राज्य की प्राथमिकताएं अब बदल रही हैं। नक्सलवाद जैसे पुराने मुद्दों की तुलना में अब बेरोज़गारी और युवाओं का भविष्य लोगों के लिए अहम हो गया है।

Unemployment in JharkhandJharkhand employment crisis
झारखंड की जनता का संदेश साफ: नौकरी दो, घोषणाएं नहीं

युवाओं में निराशा, योजनाओं का असर नहीं

राज्य सरकारों द्वारा समय-समय पर रोज़गार मेलों, कौशल विकास योजनाओं और नौकरी देने की घोषणाएं तो की जाती हैं, लेकिन जमीनी सच्चाई कुछ और ही है। बेरोज़गारी झेल रहे युवा आज भी सरकारी परीक्षाओं की प्रतीक्षा में हैं — कभी अधिसूचना नहीं आती, तो कभी परीक्षा के परिणाम में देरी होती है।

बेरोज़गारी भत्ता, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, और स्टार्टअप प्रमोशन स्कीम जैसे कदम उठाए जरूर गए, परंतु इनका व्यापक असर दिखाई नहीं देता।


नक्सलवाद और कानून व्यवस्था अब प्राथमिक मुद्दा नहीं?

इस सर्वे में सिर्फ 2% लोगों ने नक्सलवाद और कानून व्यवस्था को बड़ा मुद्दा माना। यह परिणाम चौंकाने वाला जरूर है, लेकिन यह एक संकेत भी हो सकता है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था में कुछ सुधार हुआ है या फिर अब जनता की चिंताएं बदल चुकी हैं।

राज्य में लंबे समय तक नक्सलवाद एक केंद्रीय समस्या रहा है। मगर अब ऐसा प्रतीत होता है कि जनता के लिए रोज़गार, जीवन यापन और अधिकार अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।

Unemployment in JharkhandJharkhand employment crisis
बेरोज़गारी झारखंड की सबसे बड़ी समस्या

आदिवासी अधिकार और विस्थापन: एक छुपा हुआ संकट

14% लोगों ने आदिवासी अधिकार और विस्थापन को सबसे बड़ी समस्या माना। झारखंड जैसे राज्य में जहां जनसंख्या का बड़ा हिस्सा आदिवासी समुदाय से आता है, वहां इस मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

खनन परियोजनाओं, उद्योगों और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों को उनकी ज़मीनों से विस्थापित किया गया है। कई बार पुनर्वास के नाम पर सिर्फ फॉर्मेलिटी की जाती है, जिससे आदिवासी समुदायों का गुस्सा पनपता है।


भ्रष्टाचार: एक पुराना लेकिन प्रासंगिक मुद्दा

10% प्रतिभागियों ने भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बताया। यह प्रतिशत भले ही कम लग रहा हो, लेकिन यह इस बात का प्रमाण है कि भ्रष्टाचार अब भी जनता के अनुभव में है।

सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचना, फाइलों में रिश्वत की मांग, और ठेकेदारी व्यवस्था में कमीशनखोरी — ये सब राज्य में जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की मौजूदगी को दर्शाते हैं।


डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जनता की राय: नई पत्रकारिता की मिसाल

यह सर्वे यूट्यूब कम्युनिटी पोस्ट के माध्यम से किया गया, जिसमें 148 लोगों ने वोट किया, 5 ने कमेंट किया और 4 ने इसे लाइक किया। यह दर्शाता है कि डिजिटल मीडिया अब न केवल खबर देने का माध्यम है, बल्कि जनता की राय जानने का भी सशक्त जरिया बन गया है।

ऐसे सर्वे ना सिर्फ जन भावना को दर्शाते हैं, बल्कि सरकारों और नीति निर्माताओं के लिए भी मार्गदर्शक हो सकते हैं।


निष्कर्ष: सरकार की प्राथमिकता क्या हो?

इस सर्वे से साफ है कि जनता की प्रमुख चिंता बेरोज़गारी है। युवाओं को काम चाहिए, सम्मानजनक जीवन चाहिए और भविष्य की गारंटी चाहिए। नक्सलवाद, भ्रष्टाचार या विस्थापन जैसे मुद्दे भी गंभीर हैं, लेकिन बेरोज़गारी का संकट हर वर्ग को प्रभावित कर रहा है।

झारखंड सरकार को अब अपने विकास के एजेंडे में रोज़गार को सर्वोपरि रखना होगा। केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि उनके ठोस और पारदर्शी क्रियान्वयन से ही जनता के बीच विश्वास बहाल किया जा सकता है।

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