मुख्य बिंदु-
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बिरसा समाधि स्थल, कोकर से अल्बर्ट एक्का चौक तक निकली झारखंडी एकता पद यात्रा
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झारखंड जनाधिकार महासभा ने आंदोलन नायकों को नमन करते हुए किया आयोजन
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बिरसा मुंडा, सिदो-कान्हो, फूलो-झानो सहित ऐतिहासिक क्रांतिकारियों को याद
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“कैसे लिया झारखंड—लड़ के लिया झारखंड” जैसे नारे गूंजे
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झारखंड के 25 वर्ष पूरे होने पर “कौन खाया, कौन खोया?” सवाल हुआ प्रमुख
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हजारों लोगों ने पोस्टर, बैनर और नारों के साथ दिया झारखंडी एकता का संदेश
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आंदोलन की आत्मा और संसाधनों की सुरक्षा पर वक्ताओं ने जताई चिंता
झारखंडी अस्मिता के साथ स्थापना दिवस पर रांची की बड़ी पद यात्रा
रांची- राज्य के 25वें स्थापना दिवस पर रांची में झारखंडी अस्मिता और संघर्ष पर केंद्रित एक विशाल “झारखंडी एकता पद यात्रा” निकाली गई। यह यात्रा बिरसा समाधि स्थल, कोकर से शुरू होकर अल्बर्ट एक्का चौक तक पहुंची। झारखंड जनाधिकार महासभा द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई यात्रा की शुरुआत
यात्रा की शुरुआत भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण से की गई। इसके बाद प्रतिभागियों ने उनके जीवन, संघर्ष और आंदोलन के योगदान को याद किया। इस दौरान भीड़ ने ऐतिहासिक झारखंडी क्रांतिकारियों—सिदो-कान्हो, फूलो-झानो, पोटो हो, तेलंगा खड़िया, नीलांबर-पिताम्बर सहित कई आंदोलनकारी नेताओं का सम्मान किया।
राज्य आंदोलन के दिग्गज नेताओं को नमन
यात्रा में अलग राज्य आंदोलन के अग्रणी नेताओं—जयपाल सिंह मुंडा, हन्ना बोदरा, एन. इ. होरो, ए. के. रॉय, शिबू सोरेन, बिनोद बिहारी महतो, निर्मल महतो, महेंद्र सिंह, बी.पी. केशरी और प्रो. राम दयाल मुंडा को विशेष रूप से याद किया गया। पदयात्रियों ने इन सभी नेताओं की तस्वीरों और पोस्टरों के साथ झारखंड आंदोलन की विरासत को पुनर्जीवित किया।
नारों और गीतों से गूंज उठा रांची
पूरे रास्ते “कैसे लिया झारखंड—लड़ के लिया झारखंड”, “जल-जंगल-ज़मीन हमारी जान”, “विविधता में एकता—झारखंडी एकता” जैसे नारे लगातार गूंजते रहे। यात्रा में राम दयाल मुंडा द्वारा रचित झारखंडी एकता और संघर्ष के गीतों ने जबरदस्त ऊर्जा जोड़ी।
“झारखंड के 25 साल — कौन खाया, कौन खोया?” हुआ बड़ा सवाल
यात्रा के दौरान महासभा की ओर से “कौन खाया, कौन खोया?” विषय पर पर्चे बांटे गए। इसमें झारखंड की मौजूदा स्थिति, राजनीतिक जवाबदेही और संसाधनों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने कहा कि भले ही कुछ प्रगति हुई हो, लेकिन लाखों लोग अभी भी गरीबी, विस्थापन और बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।
राज्य की चुनौतियों पर भी उठा सवाल
वक्ताओं ने कहा कि PESA नियमावली, CNT-SPT और वनाधिकार कानूनों के क्रियान्वयन में लगातार लापरवाही की गई है। साथ ही, बड़ी कम्पनियों द्वारा जमीन, खनिज और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को झारखंड की सभ्यता के लिए खतरा बताया।
नई नेतृत्व पीढ़ी की उम्मीद
महासभा ने कहा कि अब जरूरत ऐसे नेतृत्व की है जो झारखंडी मूल्यों—आज़ादी, समानता, दोस्ती और प्रकृति के सम्मान—को प्राथमिकता दे। उनका कहना है कि कुछ नेता आज भी जनता के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन व्यापक राजनीतिक सुधार की आवश्यकता है।
सैकड़ों लोगों ने लिया हिस्सा
यात्रा में अजय सिंह, अमित गाड़ी, अलोका कुजूर, शबनम केरकेट्टा, मेघनाथ, ज्यां द्रेज, एलिना होरो, टॉम कावला सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक शामिल हुए। पद यात्रा का समापन अल्बर्ट एक्का चौक पर झारखंडी एकता और मुद्दों के लिए संघर्ष के संकल्प के साथ हुआ।
