विधानसभा के सामने हजारों शिक्षकों का प्रदर्शन, मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन.

झारखंड/बिहार ताज़ा ख़बर रोज़गार समाचार

विधानसभा के सामने महाधरना

शिक्षक मोर्चा ने अपनी प्रमुख मांगों को लेकर विधानसभा के सामने महाधरना दिया। उनकी मुख्य मांगें थीं—अनुदान राशि में 75% वृद्धि के संलेख को वित्त विभाग को भेजना और राज्यकर्मी का दर्जा देने की संचिका, जो चार वर्षों से कार्मिक विभाग में लंबित है, उस पर कार्रवाई करना।

हजारों शिक्षकों की भागीदारी

महाधरना में हजारों शिक्षक और कर्मचारी शामिल हुए। इसमें 400 से 500 महिलाएं भी मौजूद थीं। संस्कृत शिक्षक पीले वस्त्रों में आए थे, जबकि मदरसा शिक्षक रमजान के महीने में भी टोपी पहनकर धरना स्थल पर पहुंचे।

मांगों को पूरा करने के नारे

धरना स्थल पर शिक्षक जोरदार नारेबाजी कर रहे थे—
“केवल मांग है दो हमारी, इसे पूरा करो पूरा करो!”

मुख्यमंत्री को सौंपा गया ज्ञापन

धरने के बाद मोर्चा के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें उनकी सभी मांगों का उल्लेख किया गया।

विभागों की अनदेखी पर आक्रोश

शिक्षकों ने एक स्वर में कहा कि सरकार सदन में आश्वासन देती है, मुख्यमंत्री सचिवालय से पत्र जारी होते हैं, लेकिन कार्मिक विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग भी दो बार स्मार पत्र भेज चुका है, फिर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया।

वित्त विभाग की देरी से असंतोष

वित्त विभाग दो बार 75% अनुदान वृद्धि के संलेख को यह कहकर लौटा चुका है कि पैसे की कमी है। शिक्षा विभाग ने फिर से संचिका वित्त विभाग को भेजी है, जिससे जल्द स्वीकृति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी देरी के खिलाफ मोर्चा ने महाधरना दिया।

मोर्चा का बड़ा ऐलान: राजभवन का घेराव और न्यायालय में याचिका

मोर्चा ने ऐलान किया कि अब वे राजभवन का घेराव करेंगे और महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेंगे। साथ ही, 75% अनुदान वृद्धि और राज्यकर्मी का दर्जा दिलाने के लिए हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की जाएगी।

अप्रैल के पहले सप्ताह में होगी याचिका दायर

आज की बैठक में सर्वसम्मति से तय हुआ कि दोनों मुद्दों पर अप्रैल के पहले सप्ताह में माननीय उच्च न्यायालय में याचिका दायर की जाएगी।

संघर्ष जारी रखने का संकल्प

मोर्चा के नेताओं का कहना था कि बीते चार वर्षों से राज्यकर्मी का दर्जा देने की संचिका कार्मिक विभाग में अटकी हुई है। 75% अनुदान वृद्धि के संलेख को भी बार-बार वित्त विभाग लौटा रहा है। इससे बाध्य होकर शिक्षकों ने न्यायालय जाने का निर्णय लिया।

संघर्ष के बिना नहीं मिलेगी जीत

गणेश महतो, रघु विश्वकर्मा, चंदेश्वर पाठक, मनोज तिर्की, विनय उरांव ने शिक्षकों को संबोधित करते हुए कहा—
“अब बिना न्यायालय के इंसाफ नहीं मिलेगा। संघर्ष ही एकमात्र रास्ता है।”

महाधरना स्थल पर हुई बैठक

धरने के बाद मोर्चा की अध्यक्ष मंडल की बैठक हुई, जिसकी अध्यक्षता फजलुल कादरी अहमद ने की। इसमें तय हुआ कि मुख्यमंत्री से दोनों मांगों को लेकर मुलाकात की जाएगी और विधायकों के साथ मिलकर दबाव बनाया जाएगा।

हाईवे जाम और संस्थानों के आगे प्रदर्शन की चेतावनी

अगर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो राज्यभर के शिक्षक हाईवे जाम करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर अपने-अपने संस्थानों के आगे बच्चों के साथ धरना देंगे, क्योंकि 25 वर्षों से बिना वेतन काम करने के कारण उनकी आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो गई है।

संघर्ष को और तेज किया जाएगा

बैठक की अध्यक्षता हरिहर प्रसाद कुशवाहा ने की और संचालन अनिल तिवारी ने किया। संजय कुमार, अरविंद सिंह और चंदेश्वर पाठक ने कहा कि अब संघर्ष ही समस्याओं का समाधान निकालेगा।

2 अप्रैल को अगली बैठक

बैठक में तय हुआ कि 2 अप्रैल को मोर्चा की अगली बैठक होगी, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी।

राज्यव्यापी दौरा और बड़ा प्रदर्शन

रघुनाथ जी ने कहा—
“अब आर-पार की लड़ाई होगी। घेराव और प्रदर्शन को और तेज किया जाएगा। राज्यव्यापी दौरा कर शिक्षकों को राजभवन घेराव के लिए तैयार किया जाएगा।”

शिक्षकों का यह आंदोलन कब तक चलेगा और सरकार उनकी मांगें कब तक मानती है, यह देखने वाली बात होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *