मुख्य बिंदु
- झारखंड की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल
- राजधानी रांची समेत कई जिलों में अपराध का बढ़ता ग्राफ
- पुलिस पर संरक्षण देने और निष्क्रियता के आरोप
- साइबर क्राइम, ड्रग्स और संगठित अपराध का जाल
- पुलिस व्यवस्था पर तीखा हमला, व्यवस्था को बताया “फेल सिस्टम”
झारखंड की कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल, अम्बा प्रसाद का तीखा हमला
झारखंड में बढ़ते अपराध और बिगड़ती कानून-व्यवस्था को लेकर अम्बा प्रसाद ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता अपराधियों से त्रस्त है और हालात ऐसे हो गए हैं कि राजधानी रांची में लोग डर के कारण रात 8 बजे ही दुकानें बंद कर देते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि हत्या, अपहरण, लूट, डकैती और जबरन वसूली जैसी घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम देकर फरार हो जा रहे हैं।
संगठित अपराध पर पुलिस की भूमिका पर सवाल
अम्बा प्रसाद ने कहा कि हत्या जैसी घटनाओं को भले ही “रैंडम” माना जा सकता है, लेकिन संगठित अपराध—जैसे ड्रग्स तस्करी, ट्रैफिकिंग, ब्राउन शुगर का कारोबार, वेश्यावृत्ति और जेल से संचालित अपराध—इन पर पुलिस चाहें तो पूरी तरह रोक लगा सकती है।
हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि
“अधिकतर संगठित अपराध पुलिस के संरक्षण में ही चल रहे हैं।”
अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला अपराध नेटवर्क
उन्होंने दावा किया कि झारखंड के अपराधी फर्जी पासपोर्ट बनाकर अजरबैजान, फ्रांस और इंग्लैंड जैसे देशों तक पहुंच रहे हैं, जो पुलिस की विफलता को दर्शाता है।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि:
- ड्रग्स का धंधा तेजी से फैल रहा है
- जेल के अंदर से भी अपराध संचालित हो रहे हैं
- साइबर अपराध के कारण जामताड़ा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम हो चुका है
अपराध का बदलता ट्रेंड
अम्बा प्रसाद ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि पहले गुमला में सबसे ज्यादा हत्याएं होती थीं, लेकिन अब रांची इस सूची में ऊपर आ गया है।
इसके अलावा उन्होंने धनबाद का जिक्र करते हुए कहा कि वहां की आपराधिक छवि इतनी मजबूत हो चुकी है कि उस पर कई फिल्में बन चुकी हैं।
पुलिस प्रशासन पर सीधा हमला
उन्होंने पुलिस और डीजीपी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि:
- रिटायरमेंट के बाद भी अधिकारियों की नियुक्ति हो रही है
- पुलिस आम जनता की सुरक्षा में विफल है
- लेकिन कमजोर लोगों पर कार्रवाई करने में आगे रहती है
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि पुलिस की हालत “12 बज चुकी” है और आपातकालीन नंबर 112 भी प्रभावी नहीं है।
डायल 112 पर भी उठे सवाल
अम्बा प्रसाद ने कहा कि पहले 100 नंबर काम नहीं करता था और अब 112 पर भी कॉल उठने में समस्या है।
“अगर 112 पर 112 बार फोन करना पड़े, तब भी नतीजा शून्य ही रहेगा।”
सरकार और सिस्टम पर ‘स्पॉन्सर्ड स्वतंत्रता’ का आरोप
उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज की व्यवस्था “स्पॉन्सर्ड स्वतंत्रता” की ओर बढ़ रही है, जहां जो सरकार को सपोर्ट करता है, वही प्राथमिकता पाता है।
उन्होंने ‘जल, जंगल, जमीन’ के नारे पर भी तंज कसते हुए कहा कि राज्य “उग्रवाद मुक्त” होने के बजाय “उपद्रव युक्त” बनता जा रहा है।
पुलिस की भूमिका पर गंभीर टिप्पणी
अम्बा प्रसाद ने आरोप लगाया कि
पुलिस एक गिरोह को खत्म करने के लिए दूसरे गिरोह का इस्तेमाल कर रही है
इससे कानून व्यवस्था और कमजोर हो रही है
उन्होंने इसे “रक्षक से भक्षक बनने” की स्थिति बताया।
निष्कर्ष: जनता में बढ़ता असुरक्षा का माहौल
कुल मिलाकर, यह बयान झारखंड की कानून-व्यवस्था पर एक बड़ा राजनीतिक हमला है, जिसमें पुलिस की कार्यप्रणाली, सरकार की भूमिका और अपराध नियंत्रण की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं।
हालांकि, इन आरोपों पर सरकार या पुलिस की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है, लेकिन इतना तय है कि यह मुद्दा आने वाले समय में राजनीतिक बहस का बड़ा केंद्र बन सकता है।
