Land Reforms Department Babulal Marandi

झारखंड में म्यूटेशन नियम बना विवाद की वजह, भाजपा ने बताया जनता विरोधी फैसला

झारखंड/बिहार ताज़ा ख़बर विधानसभा चुनाव

प्रमुख बिंदु

• म्यूटेशन आवेदन रद्द होने पर दोबारा आवेदन पर रोक
• लंबित मामलों के बीच फैसले पर सवाल
• भाजपा ने जनता के शोषण का आरोप लगाया
• 2020 के रिम्स भूमि विवाद का हवाला

——————————————

म्यूटेशन पर नया फरमान बना विवाद की वजह, बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर भ्रष्टाचार बढ़ाने का लगाया आरोप

रांची- राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा म्यूटेशन प्रक्रिया को लेकर जारी नए निर्देश पर सियासत तेज हो गई है। विभाग के आदेश के अनुसार यदि अंचलाधिकारी (CO) किसी म्यूटेशन आवेदन को रद्द कर देता है, तो उस भूमि के लिए दोबारा आवेदन नहीं किया जा सकेगा। इसी निर्णय को लेकर भाजपा ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस फैसले को “बेतुका फरमान” करार देते हुए कहा कि जब राज्य में म्यूटेशन के लगभग 50 प्रतिशत आवेदन पहले से लंबित पड़े हैं, तब पुनः आवेदन पर रोक लगाने का निर्णय भ्रष्टाचार कम करने के बजाय उसे और बढ़ावा देगा।

तकनीकी खामियों से पहले ही परेशान जनता

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि तकनीकी खामियों, सॉफ्टवेयर की दिक्कतों और प्रशासनिक लापरवाही के कारण आम लोग पहले से ही परेशान हैं। ऐसे हालात में छोटी-छोटी त्रुटियों पर आवेदन रद्द कर देना और दोबारा आवेदन का रास्ता बंद कर देना सीधे तौर पर जनता का शोषण है।

रिम्स भूमि विवाद का उदाहरण

भाजपा अध्यक्ष ने वर्ष 2020 के रिम्स भूमि विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि उसी समय बड़गाई अंचलाधिकारी द्वारा आवेदन रद्द कर दिया गया था, लेकिन बाद में डीसीएलआर ने अनुमति दी, जिसके कारण विवादित भूमि पर निर्माण हुआ और अंततः उसे ध्वस्त करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे निर्णय भविष्य में भूमि घोटालों को जन्म दे सकते हैं।

सरकार पर सीधा हमला

मरांडी ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन स्वयं स्वीकार कर चुके हैं कि उनके शासनकाल में प्रखंड और अंचल कार्यालय भ्रष्टाचार के अड्डे बन चुके हैं। ऐसे में इस तरह के आदेश थोपकर जनता का शोषण बंद किया जाना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *