Jharkhand Education वित्त रहित शिक्षक

चार स्तरीय जांच के खिलाफ सड़क पर उतरेगा मोर्चा, 10 फरवरी को राजभवन घेराव

झारखंड/बिहार ताज़ा ख़बर रोज़गार समाचार

मुख्य बिंदु

  • 10 फरवरी 2026 को राजभवन के समक्ष विशाल धरना, राज्यपाल को सौंपा जाएगा ज्ञापन

  • चार स्तरीय जांच पर तत्काल रोक और 75% अनुदान लंबित राशि पर शीघ्र निर्णय की मांग

  • 28 जनवरी को स्कूली शिक्षा सचिव को भी सौंपा जाएगा ज्ञापन

  • बजट सत्र में विधानसभा घेराव का ऐलान

———————————————————————–

रांची- झारखंड राज्य वित्त रहित शिक्षा संयुक्त संघर्ष मोर्चा ने चार स्तरीय जांच और लंबित अनुदान के मुद्दे पर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है। मोर्चा 10 फरवरी 2026 को राजभवन के समक्ष विशाल धरना देगा और महामहिम राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेगा। ज्ञापन के माध्यम से चार स्तरीय जांच पर अभिलंब रोक लगाने के लिए आवश्यक निर्देश देने और 75% अनुदान की राशि, जो मुख्यमंत्री स्तर पर लंबित है, उस पर शीघ्र पहल करने का आग्रह किया जाएगा।
यह निर्णय मंगलवार, 20 जनवरी 2026 को अध्यक्ष मंडल की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष मंडल के वरीय सदस्य हरिहर प्रसाद कुशवाहा ने की।

28 जनवरी को सचिवालय में ज्ञापन

मोर्चा ने यह भी निर्णय लिया है कि 28 जनवरी 2026 को सचिव, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग को चार स्तरीय जांच रोकने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा जाएगा। मोर्चा का कहना है कि यह जांच न तो न्यायसंगत है, न विधिसम्मत और न ही अधिनियम व नियमावली के अनुरूप संवैधानिक है।

सोना-चांदी के दाम में भारी उछाल, 22 और 24 कैरेट गोल्ड हुआ महंगा

अधिनियम के विपरीत है चार स्तरीय जांच

मोर्चा के अनुसार अधिनियम में स्पष्ट प्रावधान है कि झारखंड अधिविध परिषद (जैक) कागजातों की जांच कर अनुदान की अनुशंसा विभाग को करेगा और विभाग द्वारा गठित अनुदान समिति अनुदान पर निर्णय लेगी। इसके बावजूद चार स्तरीय जांच लागू करना संस्थानों को परेशान करने और अवैध उगाही को बढ़ावा देने जैसा है।

अनुदान राशि और जांच का औचित्य

मोर्चा ने सवाल उठाया कि इंटर कॉलेजों को वर्ष में एक बार 16 लाख 80 हजार रुपये, उच्च विद्यालयों को 7 लाख 20 हजार रुपये, संस्कृत व मदरसा विद्यालयों को 3 लाख 60 हजार रुपये तथा अधिकतम 7 लाख 20 हजार रुपये का अनुदान मिलता है, फिर इतनी कम राशि के लिए चार स्तरीय जांच का क्या औचित्य है।

अधिविध परिषद अधिनियम का हवाला

मोर्चा का कहना है कि झारखंड अधिविध परिषद अधिनियम 2002 एवं संशोधित अधिनियम 2006 में यह स्पष्ट है कि परिषद तीन वर्ष या उसके भीतर कभी भी स्कूल और इंटर कॉलेजों की मान्यता की जांच कर सकती है और मानक पूरा नहीं करने पर मान्यता रद्द करने की अनुशंसा सरकार से कर सकती है। जैक समय-समय पर जांच करता है और कार्रवाई भी होती रही है। भूमि और भवन जैसे मानक अचानक समाप्त नहीं होते, उनकी जांच निरंतर होती रहती है।

बजट सत्र में विधानसभा घेराव

बैठक में यह भी तय किया गया कि बजट सत्र के दौरान मोर्चा अपनी दो सूत्री मांगों को लेकर विधानसभा का घेराव करेगा। नेताओं ने कहा कि महंगाई के इस दौर में 75% अनुदान बढ़ाने के प्रस्ताव पर वित्त एवं विधि विभाग की सहमति के बावजूद कैबिनेट से अनुमोदन लंबित है, जिससे शिक्षकों के समक्ष भुखमरी जैसी स्थिति बन गई है।

अन्य मांगें भी होंगी शामिल

मोर्चा ने जैक उपाध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर भी राज्यपाल को ज्ञापन देने का निर्णय लिया है, क्योंकि यह पद पिछले एक वर्ष से रिक्त है। साथ ही बिहार की तर्ज पर वित्त रहित शिक्षक-कर्मचारियों को राज्यकर्मी का दर्जा देने की मांग मुख्यमंत्री से की जाएगी।

बैठक में ये रहे उपस्थित

बैठक में कुंदन कुमार सिंह, रघुनाथ सिंह, फजलुल कादरी अहमद, गणेश महतो, अरविंद सिंह, चंदेश्वर पाठक, मनीष कुमार, देवनाथ सिंह, मनोज तिर्की, विनय उरांव, रेशमा बेक, संजय कुमार, नरोत्तम सिंह, बिरसो उरांव, पशुपति महतो, अनिल तिवारी, रघु विश्वकर्मा, मनोज कुमार, मुरारी प्रसाद सिंह, रंजीत मिश्रा सहित अध्यक्ष मंडल के सभी सदस्य उपस्थित रहे। मोर्चा के निर्णयों की जानकारी प्रेस को मनीष कुमार ने दी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *