मानसून सत्र में 324 प्रश्न, 70 शून्यकाल और 34 ध्यानाकर्षण हुए शामिल.

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झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र संपन्न, स्पीकर रबीन्द्र नाथ महतो ने अभिभाषण में गिनाई उपलब्धियाँ

झारखंड विधानसभा का मानसून सत्र 1 अगस्त से 7 अगस्त 2025 तक आयोजित हुआ। हालांकि, 4 अगस्त को पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन के कारण सत्र स्थगित करना पड़ा। इसके बाद पुनः आहूत किए गए विशेष मानसून सत्र की कार्यवाही 22 अगस्त से 28 अगस्त तक चली और आज इसका समापन हुआ।

324 प्रश्न, 70 शून्यकाल और 34 ध्यानाकर्षण

इस सत्र के दौरान सदन में कुल 324 प्रश्न स्वीकृत किए गए, जिनमें 107 अल्पसूचित, 183 तारांकित और 34 अतारांकित प्रश्न शामिल थे। शून्यकाल में 70 सूचनाएँ स्वीकार की गईं। वहीं कुल 21 आवेदन प्राप्त हुए। ध्यानाकर्षण की 34 सूचनाएँ आईं, जिनमें से 20 स्वीकृत हुईं और 4 सदन में प्रस्तुत की गईं।

पाँच प्रमुख विधेयक पेश

इस मानसून सत्र में प्रथम अनुपूरक बजट के साथ 5 अन्य महत्वपूर्ण विधेयक भी पेश किए गए। इनमें शामिल हैं—

  • झारखंड राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025

  • झारखंड व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (शुल्क विनियमन) विधेयक

  • झारखंड कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक 2025

  • झारखंड लघु, लघु एवं मध्यम उद्यम (विशेष रियायत) विधेयक

  • झारखंड प्लेटफॉर्म आधारित गिग मजदूर (नियंत्रण एवं कल्याण) विधेयक 2025

गिग मजदूरों के लिए ऐतिहासिक कदम

स्पीकर ने कहा कि प्लेटफॉर्म आधारित गिग मजदूर विधेयक राज्य सरकार की ओर से सामाजिक न्याय और सुरक्षा की दिशा में एक अहम कदम है। इस विधेयक के जरिए गिग वर्करों की पहचान, लाखों युवाओं की सामाजिक सुरक्षा, कानूनी संरक्षण और कंपनियों की जवाबदेही तय करने के लिए ठोस पहल की गई है। इसे एक मील का पत्थर बताते हुए स्पीकर ने कहा कि यह कानून अन्य राज्यों के लिए भी मॉडल बन सकता है।

शिक्षा सुधार के लिए विधेयक

मानसून सत्र में पारित झारखंड व्यावसायिक शिक्षा संस्थान (शुल्क विनियमन) विधेयक को निजी शिक्षा संस्थानों की फीस संरचना में पारदर्शिता सुनिश्चित करने वाला कदम बताया गया। वहीं झारखंड कोचिंग सेंटर (नियंत्रण एवं विनियमन) विधेयक को छात्रों की सुरक्षा, अधिकारों की रक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया गया।

विपक्ष पर भी साधा निशाना

स्पीकर महतो ने अपने अभिभाषण में कहा कि सदन की कार्यवाही के दौरान कई माननीय सदस्य बार-बार अपनी राजनीतिक अपेक्षाओं को प्राथमिकता देते हुए स्थानीय समस्याओं की अनदेखी करते रहे। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती तभी संभव है जब हर सदस्य अपने दायित्व का निष्ठा से निर्वहन करे।

शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि

अभिभाषण के अंत में विधानसभा अध्यक्ष ने दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री और जननायक शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन जैसे नेता सदैव झारखंड की जनता के दिलों में अमर रहेंगे।

धन्यवाद ज्ञापन

स्पीकर ने मुख्यमंत्री, मंत्रिपरिषद, सभी दलों के नेताओं, विधायकों, विधानसभा सचिवालय के अधिकारियों-कर्मचारियों, पुलिस बल और मीडिया प्रतिनिधियों का धन्यवाद दिया, जिन्होंने सत्र को सफल बनाने में योगदान दिया।

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