दिल्ली में OBC अधिकार सम्मेलन: राहुल गांधी के मिशन को झारखंड से मिला समर्थन, अम्बा प्रसाद और योगेंद्र साव रहे अगुआ
मुख्य बिंदु-
-
तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित हुआ ऐतिहासिक OBC अधिकार सम्मेलन।
-
राहुल गांधी की रही मौजूदगी।
-
अम्बा प्रसाद और योगेंद्र साव ने सैकड़ों समर्थकों संग दिखाई भागीदारी।
-
झारखंड के विभिन्न क्षेत्रों से OBC कार्यकर्ताओं की मौजूदगी।
-
सम्मेलन ने OBC अधिकारों को लेकर सामाजिक आंदोलन की नींव रखी।
नई दिल्ली, 26 जुलाई 2025 – राजधानी दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में शनिवार को आयोजित “OBC अधिकार सम्मेलन” में सामाजिक न्याय की बुलंद आवाज़ गूंजी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के OBC समुदाय को जनसंख्या के अनुपात में संवैधानिक और संस्थागत प्रतिनिधित्व देने की मुहिम को मजबूत करते हुए इस सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक मौके पर झारखंड से पूर्व विधायक अम्बा प्रसाद और राज्य सरकार में मंत्री योगेंद्र साव सैकड़ों समर्थकों के साथ सम्मेलन में शामिल हुए और मंच से OBC वर्ग के हक की बात उठाई।
राहुल गांधी का ‘OBC को हक दो’ अभियान केंद्र में
कार्यक्रम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘OBC को उनका अधिकार दो’ अभियान की गूंज स्पष्ट रूप से सुनाई दी। वक्ताओं ने OBC समाज को राजनीतिक, प्रशासनिक और शैक्षिक संस्थानों में उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व देने की मांग दोहराई। यह सम्मेलन सिर्फ एक राजनीतिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का बिगुल बताया गया।
झारखंड से उमड़ा जनसैलाब
झारखंड के बड़कागांव, पतरातू, केरेडारी समेत विभिन्न इलाकों से आए सैकड़ों OBC कार्यकर्ताओं ने सम्मेलन में जोश और जुनून के साथ भाग लिया। “OBC को हक़ दो”, “सामाजिक न्याय ज़िंदाबाद” जैसे नारों से तालकटोरा स्टेडियम गूंज उठा। कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी के अभियान को गांव-गांव पहुंचाने का संकल्प भी दोहराया।
कारगिल विजय दिवस: 1999 में आज ही के दिन भारत ने जीता था युद्ध.
अम्बा प्रसाद और योगेंद्र साव की सक्रिय भूमिका
बड़कागांव की पूर्व विधायक अम्बा प्रसाद और मंत्री योगेंद्र साव न केवल झारखंड से आए कार्यकर्ताओं का नेतृत्व कर रहे थे, बल्कि सम्मेलन में उन्होंने जोर देकर कहा कि—”OBC को सिर्फ वोट बैंक समझने की राजनीति अब नहीं चलेगी। हमें जनसंख्या के अनुपात में हक चाहिए, और इसके लिए हम पूरे देश में जनआंदोलन खड़ा करेंगे।”
सामाजिक समावेशन की ओर एक ठोस कदम
कार्यक्रम में मौजूद नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे केवल चुनावी रणनीति नहीं बल्कि सामाजिक समावेश की दिशा में ठोस पहल बताया। सम्मेलन में OBC समुदाय की उपेक्षा पर चिंता जताई गई और इसे संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया गया।
राजनीतिक संदेश के साथ सामाजिक चेतना का विस्तार
OBC अधिकार सम्मेलन ने यह स्पष्ट कर दिया कि आने वाले दिनों में OBC समुदाय सिर्फ संख्या में नहीं, बल्कि आवाज़ में भी निर्णायक भूमिका निभाएगा। दिल्ली से उठी यह आवाज़ अब राज्यों तक पहुंचेगी और जातिगत जनगणना से लेकर आरक्षण तक के मुद्दों को नई धार देगी।
