मुंबई में संदिग्ध बांग्लादेशी पकड़े गए, साहिबगंज से बने थे आधार कार्ड- बाबूलाल.

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मुख्य बिंदु-

  • बाबूलाल मरांडी ने उठाए गंभीर सवाल: मुंबई में पकड़े गए 13 संदिग्ध बांग्लादेशियों के आधार कार्ड साहिबगंज जिले से बने हैं।

  • आधार कार्ड में समान जन्मतिथि: सभी संदिग्धों का जन्मतिथि 1 जनवरी अंकित है, जिससे मामला और भी संदिग्ध बनता है।

  • साहिबगंज जिला प्रशासन की प्रतिक्रिया: एसपी ने कहा कि डीसी ने मामले की जांच के लिए एक कमेटी बनाई है।

  • झारखंड सरकार पर आरोप: मरांडी ने आरोप लगाया कि सरकार वोट बैंक के लिए बांग्लादेशियों को घुसपैठ करा रही है।

  • संतालपरगना में आदिवासी अस्तित्व का खतरा: घुसपैठ की वजह से आदिवासियों के अस्तित्व पर संकट पैदा हो सकता है।

  • हेमंत सोरेन सरकार का बचाव: मरांडी ने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि जब घुसपैठ की जांच हाईकोर्ट द्वारा आदेशित की गई, तो राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में गई और जांच को रोकने की कोशिश की।

  • कड़ी कार्रवाई की मांग: मरांडी ने जांच को दबाने के बजाय उसे तेज़ी से निपटाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।



मुंबई में 13 संदिग्ध बांग्लादेशी हिरासत में, आधार कार्ड साहिबगंज से बने

नेता प्रतिपक्ष और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने एक बार फिर झारखंड सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में उन्होंने लिखा कि मुंबई में पुलिस ने 13 संदिग्ध बांग्लादेशियों को हिरासत में लिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन सभी का आधार कार्ड झारखंड के साहिबगंज जिले के राधानगर इलाके से बना हुआ है।

इन हिरासत में लिए गए लोगों में 12 पुरुष और 1 महिला शामिल हैं। हैरानी की बात यह भी है कि सभी के आधार कार्ड में जन्म तिथि एक ही — 1 जनवरी — दर्ज है, जो इस पूरे मामले को बेहद संदिग्ध बनाता है।

बाबूलाल मरांडीमुंबई बांग्लादेशी संदिग्ध
हेमंत सरकार पर बाबूलाल मरांडी का निशाना

साहिबगंज प्रशासन ने जांच के आदेश दिए

बाबूलाल मरांडी ने बताया कि जब इस मामले को लेकर साहिबगंज के एसपी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जिले के उपायुक्त (DC) ने एक जांच कमेटी गठित कर दी है। इस कमेटी को पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि मरांडी ने आशंका जताई कि जांच को सिर्फ खानापूर्ति बनाकर न छोड़ा जाए, बल्कि मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष और तेज़ी से जांच की जाए।


साहिबगंज और पाकुड़ के रास्ते घुसपैठ का खतरा

बाबूलाल मरांडी ने इस पूरे घटनाक्रम को झारखंड के लिए एक गंभीर चेतावनी बताया। उन्होंने कहा कि चूंकि साहिबगंज और पाकुड़ जिले की सीमाएँ बांग्लादेश के निकट हैं, इसलिए ये इलाके लंबे समय से घुसपैठियों के लिए सुगम रास्ता बने हुए हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड सरकार, विशेष रूप से हेमंत सोरेन के नेतृत्व में, वोट बैंक की राजनीति के चलते बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठियों को राज्य में प्रवेश दिला रही है। आधार कार्ड और वोटर कार्ड जैसे दस्तावेजों की अवैध तरीके से आपूर्ति कराकर उन्हें भारतीय नागरिकता का दर्जा दिलाया जा रहा है।


संतालपरगना के आदिवासियों के अस्तित्व पर संकट

मरांडी ने चेताया कि इस प्रकार की घुसपैठ से सबसे अधिक खतरा संतालपरगना क्षेत्र के मूल आदिवासी समुदायों पर मंडरा रहा है। यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी तो आने वाले वर्षों में संतालपरगना में आदिवासी समाज का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि जनसंख्या संतुलन बिगाड़ने के साथ-साथ सामाजिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को भी नुकसान पहुँचाया जा रहा है।


हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद घुसपैठ जांच को रोका गया

बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि जब झारखंड हाईकोर्ट ने घुसपैठ के मामलों की जांच का आदेश दिया था, तब हेमंत सोरेन सरकार ने उस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

मरांडी ने सवाल उठाया कि अगर सरकार को घुसपैठ के मामलों में कुछ भी गलत नहीं करना था तो फिर जांच से डरने की क्या जरूरत थी? उन्होंने कहा कि सरकार का सुप्रीम कोर्ट जाना इस बात का प्रमाण है कि वह सच्चाई को छुपाना चाहती है।


सरकार से कड़ी कार्रवाई की मांग

बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार से मांग की कि इस पूरे प्रकरण में लीपापोती करने की बजाय पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कराई जाए।

उन्होंने जोर देकर कहा कि मुंबई में पकड़े गए लोगों का आधार कार्ड कब बना, किसने बनाया और किन दस्तावेजों के आधार पर बना — इन सभी तथ्यों को तुरंत सार्वजनिक किया जाए। दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न दोहराई जाएं।

साथ ही, उन्होंने मांग की कि साहिबगंज जिला प्रशासन इस मामले की वस्तुस्थिति से आम जनता और विपक्ष को भी अवगत कराए।


घुसपैठ पर रोक और राज्य की सुरक्षा सर्वोपरि

मरांडी ने अपनी पोस्ट के अंत में कहा कि राज्य की सुरक्षा और आदिवासी समुदाय के अस्तित्व की रक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। घुसपैठ जैसी घटनाएं न केवल सामाजिक ढांचे को प्रभावित करती हैं बल्कि आंतरिक सुरक्षा के लिए भी खतरा बनती हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस तरह की गतिविधियों को रोकने में विफल रही, तो भाजपा और विपक्ष जन आंदोलन के जरिए सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए बाध्य होंगे।

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