रांची में 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला की सफल ओपन हार्ट सर्जरी, पारस एचईसी हॉस्पिटल ने रचा नया कीर्तिमान
रांची: पारस एचईसी हॉस्पिटल ने एक बार फिर उन्नत चिकित्सा सुविधाओं और अनुभवी डॉक्टरों की टीम के दम पर जटिल हृदय रोग उपचार में बड़ी सफलता हासिल की है। अस्पताल में 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला कौशल्या देवी की सफल ओपन हार्ट सर्जरी कर यह साबित कर दिया गया कि सही मेडिकल प्लानिंग और टीमवर्क के साथ उम्र इलाज में बाधा नहीं बनती।
10 साल से हृदय रोग से पीड़ित थीं मरीज
चतरा जिले की रहने वाली कौशल्या देवी पिछले लगभग 10 वर्षों से हृदय रोग से पीड़ित थीं। इस दौरान वे कई अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती हुईं, लेकिन ओपन हार्ट सर्जरी की जटिलता और उम्र को देखते हुए सर्जरी नहीं हो पाई। हाल ही में अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें आपात स्थिति में पारस एचईसी हॉस्पिटल, रांची में भर्ती कराया गया।
जांच में सामने आई गंभीर स्थिति
अस्पताल के वरिष्ठ कार्डियक सर्जन डॉ. कुणाल हजारी ने तत्काल विस्तृत जांच कराने की सलाह दी। जांच में पाया गया कि मरीज के दिल की कार्यक्षमता यानी ईएफ (Ejection Fraction) मात्र 30 प्रतिशत रह गई थी। अधिक उम्र और शारीरिक कमजोरी के कारण यह मामला चिकित्सकीय रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था।
ओपन हार्ट सर्जरी का लिया गया फैसला
सभी जोखिमों का आकलन करने के बाद डॉ. कुणाल हजारी और उनकी विशेषज्ञ टीम ने ओपन हार्ट सर्जरी का निर्णय लिया। सर्जरी तकनीकी रूप से सफल रही, हालांकि ऑपरेशन के बाद मरीज को वेंटिलेटर से हटाना एक बड़ी चुनौती साबित हुआ।
आईसीयू टीम की सतत निगरानी से मिली सफलता
लगातार कई दिनों तक कार्डियक इंटेंसिविस्ट, नर्सिंग स्टाफ और सपोर्ट टीम की कड़ी निगरानी व अथक प्रयासों के बाद मरीज को सुरक्षित रूप से वेंटिलेटर से हटाया गया। इसके बाद उनकी सेहत में धीरे-धीरे सुधार होता गया और स्थिति स्थिर हो गई।
डेढ़ महीने बाद पूरी तरह स्वस्थ
अस्पताल से छुट्टी के बाद मरीज को घर पर नर्सिंग केयर की सलाह दी गई थी। ऑपरेशन के लगभग डेढ़ महीने बाद अब कौशल्या देवी पूरी तरह स्वस्थ हैं और नियमित फॉलो-अप के लिए अस्पताल आ रही हैं।
हॉस्पिटल प्रबंधन ने जताया संतोष
इस सफलता पर पारस एचईसी हॉस्पिटल के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. नीतेश कुमार ने कहा कि यह सर्जरी हॉस्पिटल की क्लिनिकल एक्सीलेंस, अत्याधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और मल्टी-डिसिप्लिनरी टीमवर्क का परिणाम है। उन्होंने कहा कि अधिक उम्र के मरीजों में इस तरह की जटिल सर्जरी बड़ी चुनौती होती है, लेकिन डॉक्टरों, इंटेंसिव केयर टीम और नर्सिंग स्टाफ के समन्वित प्रयासों से यह संभव हो पाया। साथ ही उन्होंने झारखंड के मरीजों को भविष्य में भी विश्वस्तरीय हृदय चिकित्सा उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई।
