रांची समेत कई जिलों में आंधी-तूफान की चेतावनी, अगले 48 घंटे रहें सतर्क.

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झारखंड के 18 जिलों में वज्रपात और आंधी का अलर्ट, रांची समेत इन इलाकों में सतर्क रहने की जरूरत

मुख्य बिंदु:

  • 4 जून सुबह 8:30 बजे से 5 जून सुबह 8:30 बजे तक अलर्ट प्रभावी

  • 18 जिलों में वज्रपात और आंधी की चेतावनी, ‘वॉच’ की स्थिति में

  • 6 जिलों को ‘नो वार्निंग’ श्रेणी में रखा गया, फिलहाल कोई खतरा नहीं

  • मौसम विज्ञान केंद्र, रांची ने जारी की चेतावनी



झारखंड के मौसम में एक बार फिर बदलाव के संकेत मिले हैं। मौसम विज्ञान केंद्र, रांची ने आगामी 4 जून से 5 जून 2025 तक के लिए राज्य के 18 जिलों में वज्रपात और आंधी की चेतावनी जारी की है। यह अलर्ट 2 जून 2025 को जारी किया गया और 4 जून सुबह 8:30 बजे से 5 जून सुबह 8:30 बजे तक प्रभावी रहेगा।

किन जिलों में है वज्रपात का खतरा?

मौसम विभाग के मुताबिक राज्य के उत्तर और मध्य हिस्से के 18 जिलों को ‘वॉच (Be Updated)’ श्रेणी में रखा गया है। इन जिलों में हल्की से मध्यम तीव्रता की आंधी और बिजली गिरने की संभावना है। प्रभावित जिलों के नाम इस प्रकार हैं:

गढ़वा, पलामू, लातेहार, चतरा, लोहरदगा, हजारीबाग, कोडरमा, गिरिडीह, रामगढ़, रांची, बोकारो, धनबाद, देवघर, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़ और जामताड़ा।

इन जिलों के नागरिकों को अगले 48 घंटों तक सतर्क रहने की सलाह दी गई है, खासकर खुले मैदानों और ऊँचे पेड़ों के पास जाने से बचने के निर्देश दिए गए हैं।

कौन-कौन से जिले सुरक्षित?

राज्य के दक्षिणी क्षेत्र में स्थित गुमला, सिमडेगा, खूंटी, पश्चिम सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जिलों को हरे रंग (‘नो वार्निंग’) में रखा गया है। इसका मतलब है कि इन जिलों में फिलहाल किसी प्रकार के खराब मौसम की आशंका नहीं है।

क्या करें, क्या न करें?

  • मौसम विभाग ने लोगों को बिजली गिरने के दौरान खुले मैदानों में ना जाने, मोबाइल/इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूरी बनाए रखने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है।

  • किसानों को सलाह दी गई है कि वे आकाशीय बिजली से बचने के लिए खेतों में कार्य करने से बचें।

  • स्कूलों और प्रशासनिक संस्थानों को भी अलर्ट पर रहने की हिदायत दी गई है।

निष्कर्ष

राज्य के अधिकांश जिलों में एक बार फिर से मौसम का मिजाज बिगड़ सकता है। विशेष रूप से बिजली गिरने की घटनाएं आम लोगों के लिए जानलेवा हो सकती हैं। ऐसे में समय रहते सतर्क रहना ही सबसे अच्छा उपाय है। मौसम विभाग की ताज़ा जानकारी और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।

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