मुख्य बिंदु:
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ओबीसी छात्रवृत्ति भुगतान को लेकर बढ़ा विवाद
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मंत्री चंपाई सोरेन ने कहा — राज्य की राशि तैयार, केंद्र से नहीं मिली 60% हिस्सेदारी
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‘मैयां सम्मान योजना’ को कारण बताना निराधार बताया
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झामुमो महासचिव कुणाल षाड़ंगी ने मंत्री का बयान सोशल मीडिया पर साझा किया
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भाजपा नेताओं से अपील — “राज्य सरकार पर आरोप नहीं, केंद्र पर डालें दबाव
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रांची:
झारखंड में ओबीसी वर्ग के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति भुगतान में देरी को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में मचे हंगामे के बीच झामुमो के प्रदेश प्रवक्ता कुणाल षाड़ंगी सामने आए हैं। उन्होंने इस विषय पर मंत्री चमरा लिंडा की विस्तृत प्रतिक्रिया को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा कि “किसी भी मुद्दे का राजनीतिकरण करने से पहले तथ्यों को समझना ज़रूरी है।”
कुणाल षाड़ंगी ने अपने पोस्ट में लिखा कि कई दिनों से छात्रों और अभिभावकों के कॉल आ रहे हैं, जबकि सोशल मीडिया पर लगातार सवाल-जवाब का दौर चल रहा है। ऐसे में उन्होंने स्वयं मंत्री से लंबी बातचीत की और वास्तविक स्थिति जानी।
“राज्य की 40% राशि तैयार, केंद्र से 60% बकाया”
मंत्री ने कुणाल षाड़ंगी को बताया कि राज्य सरकार की ओर से छात्रवृत्ति की 40% Matching राशि तैयार है, लेकिन केंद्र सरकार से मिलने वाली 60% राशि अब तक लंबित है। इस विषय पर राज्य सरकार ने कई बार केंद्र से पत्राचार किया है।
मंत्री ने कहा कि यह कहना पूरी तरह गलत है कि ‘मंईयां सम्मान योजना’ के कारण छात्रवृत्ति रोकी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भ्रामक और निराधार अफवाह है।
भाजपा नेताओं से की अपील
मंत्री ने कहा कि प्रदेश के भाजपा नेता और सांसद राज्य सरकार पर बयानबाज़ी करने के बजाय अपने केंद्र सरकार पर दबाव बनाएं ताकि छात्रों की छात्रवृत्ति की राशि जल्द विमुक्त हो सके।
कुणाल षाड़ंगी ने भी अपने पोस्ट में इस अपील को दोहराया और कहा कि विद्यार्थियों का भविष्य राजनीति का विषय नहीं बनना चाहिए। उन्होंने लिखा, “तथ्यों के आधार पर बात करना ज़रूरी है। केंद्र और राज्य दोनों की भूमिका स्पष्ट है, इसलिए समाधान के लिए समन्वय आवश्यक है।”
ओबीसी छात्रवृत्ति भुगतान को लेकर जारी भ्रम और अफवाहों के बीच झामुमो नेता कुणाल षाड़ंगी द्वारा साझा किया गया मंत्री का बयान अब इस पूरे विवाद पर स्पष्टता लाता है। अब निगाहें केंद्र सरकार की ओर हैं कि कब तक उसकी हिस्सेदारी जारी होगी ताकि विद्यार्थियों को राहत मिल सके।
