15 जिलों में एसपी का तबादला लेकिन डीजीपी पर चुप्पी: मरांडी ने उठाए सवाल.

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🔷 मुख्य बिंदु 

  • बाबूलाल मरांडी ने डीजीपी पद की रिक्तता को लेकर सरकार पर साधा निशाना

  • 15 जिलों में एसपी तबादला, लेकिन राज्य डीजीपी अब तक नियुक्त नहीं

  • मुख्यमंत्री पर संवैधानिक टकराव और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप

  • शराब घोटाले की तपिश और अनुराग गुप्ता से जुड़े मामलों का जिक्र

  • सरकार को चेतावनी: “अब भी समय है, सही सलाह मान लीजिए”



🔶 डीजीपी पद रिक्त: सुरक्षा को लेकर सरकार पर गंभीर सवाल

झारखंड में पिछले एक महीने से पुलिस विभाग के सर्वोच्च पद डीजीपी (पुलिस महानिदेशक) की कुर्सी खाली पड़ी है। इस विषय पर झारखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सरकार पर प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि जब 15 जिलों में पुलिस अधीक्षकों का तबादला किया जा सकता है, तो राज्य स्तर पर डीजीपी की नियुक्ति क्यों नहीं की गई?

 

🟠 संवैधानिक टकराव को बढ़ावा दे रही सरकार: मरांडी

मरांडी ने अपने बयान में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बार-बार पत्र भेजे जाने के बावजूद राज्य सरकार डीजीपी की नियुक्ति नहीं कर रही है। यह स्थिति संवैधानिक टकराव को जन्म दे रही है, जो प्रशासनिक व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम है।

🟥 “शराब घोटाले की तपिश आप तक पहुंच सकती है”: मरांडी की चेतावनी

बाबूलाल मरांडी ने अपने बयान में झारखंड के चर्चित शराब घोटाले का भी जिक्र करते हुए कहा कि इसकी आंच देर-सबेर मुख्यमंत्री तक जरूर पहुंचेगी। उन्होंने संकेत दिया कि जैसे उनके पूर्व प्रधान सचिव की भूमिका ने सरकार को कठघरे में खड़ा किया, वैसे ही अनुराग गुप्ता से गैरकानूनी काम कराना हेमंत सोरेन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।



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🟡 अनुराग गुप्ता पर पुराना आरोप: चुनाव आयोग से टकराव

अनुराग गुप्ता, जिनका जिक्र बाबूलाल मरांडी ने किया, पहले भी विवादों में रहे हैं। 2019 में चुनाव आयोग ने भी उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की थी। ऐसे में मरांडी का बयान यह दर्शाता है कि वह सरकार के प्रशासनिक फैसलों में पारदर्शिता की कमी को उजागर करने की कोशिश कर रहे हैं।

🟢 जनता की सुरक्षा बनाम सत्ता की राजनीति

डीजीपी जैसे अहम पद को लंबे समय तक खाली रखना केवल प्रशासनिक देरी नहीं, बल्कि जनता की सुरक्षा के साथ समझौता भी है। मरांडी ने अपने पोस्ट में साफ कहा कि यह लापरवाही इस बात का संकेत है कि सरकार आम लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दे रही है, बल्कि राजनीतिक हितों को ऊपर रख रही है।

🔵 क्या हेमंत सरकार दबाव में है?

राज्य में कानून व्यवस्था को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। अब डीजीपी पद की रिक्तता और शराब घोटाले जैसे मुद्दे सरकार पर राजनीतिक और नैतिक दबाव बढ़ा रहे हैं। मरांडी का यह बयान आगामी राजनीतिक संघर्ष और सरकार की जवाबदेही पर केंद्रित है।

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