मुख्य बिंदु
-
संत अल्बर्ट्स कॉलेज, रांची में आयोजित हुई वार्षिक संगोष्ठी
-
विषय: “आदिवासी आत्मा का जागरण”
-
चार समूहों ने प्रस्तुत किए शोध पत्र
-
डॉ. सुमन कुमार एक्का बोले – अपनी संस्कृति से फिर जुड़ने की जरूरत
-
छात्रों ने बाइबिल, पर्यावरण और आदिवासी दृष्टिकोण पर रखे विचार
-
कार्यक्रम का समापन सेमिनरी गीत से हुआ
रांची के संत अल्बर्ट्स कॉलेज में ‘आदिवासी आत्मा का जागरण’ पर संगोष्ठी
रांची, 25 अक्टूबर 2025- संत अल्बर्ट्स कॉलेज में शनिवार को पहले सेमेस्टर के छात्रों के लिए ‘आदिवासी आत्मा के जागरण’ विषय पर वार्षिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ कॉलेज सभागार में प्रार्थना के साथ हुआ। इसमें छात्रों ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आदिवासी संस्कृति, आध्यात्मिकता और पर्यावरणीय जुड़ाव पर अपने विचार रखे।

चार समूहों ने प्रस्तुत किए शोध पत्र
संगोष्ठी में चार समूहों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। इन समूहों का मार्गदर्शन डॉ. थियोडोर टोप्पो, डॉ. जॉन क्रस्टा, डॉ. सुमन कुमार एक्का और फादर फैबियन कुल्लू ने किया। ईसशास्त्र के फैकल्टी अध्यक्ष डॉ. सुमन कुमार एक्का ने कहा कि आज कई कारणों से लोग अपनी संस्कृति से दूर हो रहे हैं, जबकि आदिवासी आत्मा को पुनः प्रज्वलित करने की आवश्यकता है।

पहला विषय – ईश्वर का राज्य और सौहार्द की आदिवासी दृष्टि
ब्रदर राकेश मिंज ने बाइबिल के दृष्टिकोण से कहा कि ईश्वर का राज्य भौतिकता नहीं, बल्कि आध्यात्मिकता और नैतिकता पर आधारित है। सिस्टर मेरी टुडू ने कहा कि ईश्वर का राज्य सभी जातियों और संस्कृतियों को न्याय, प्रेम और एकता के साथ जोड़ता है।
दूसरा विषय – द्वितीय वाटिकन परिषद और आदिवासी आत्मा का जागरण
सिस्टर शांतिला खाखलो ने कहा कि आदिवासी अपनी विशिष्ट पहचान के साथ समाज में योगदान देते हैं। ब्रदर माइकल टोप्पो ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति और संस्कृति ईश्वर की मुक्ति-योजना का हिस्सा है।
तीसरा विषय – पारिस्थितिक ज्ञान और बाइबिलीय प्रबंधत्व
ब्रदर बाल्तासर हेंब्रम ने कहा कि ईसा मसीह के दृष्टांतों में प्रकृति के प्रति गहरी एकात्मता झलकती है। ब्रदर एंथोनी आशिष राय ने कहा कि झारखंड की सांस्कृतिक विरासत आदिवासी समुदायों के आपसी संबंध की मिसाल है।
चौथा विषय – भविष्यवाणी, प्रतिरोध और मुक्ति
ब्रदर अशोक थुडुम ने कहा कि ईश्वर मुक्ति के कार्यों के माध्यम से स्वयं को प्रकट करते हैं। ब्रदर समीर बड़ा ने छोटानागपुर के विविध समुदायों को “आदिवासी एकता” का प्रतीक बताया।
कार्यक्रम का संचालन और समापन
प्रथम सत्र का संचालन ब्रदर क्लेमेंटा डिगल और द्वितीय सत्र का संचालन ब्रदर जिबिन सेबेस्टियन ने किया। अंत में ब्रदर प्रभोध बोलियार सिंह ने प्रतिभागियों को बधाई दी और कार्यक्रम का समापन सेमिनरी गीत के साथ हुआ।
