‘स्कूल रूआर 2025’: हर बच्चा पढ़े, हर बच्चा बढ़े- झारखंड की नई शैक्षणिक पहल.

झारखंड/बिहार

स्कूल रूआर 2025 अभियान का शुभारंभ: हर बच्चा स्कूल जाए, शिक्षा से कोई वंचित न रहे

रांची, 23 अप्रैलझारखंड सरकार ने शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाने की दिशा में एक और ठोस पहल की है। रांची जिले में “स्कूल रूआर 2025 (Back to School Campaign)” कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत मंगलवार को जिला उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने की। अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव जिला मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय परिसर में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में दीप प्रज्वलन और जनजागरूकता गीत के साथ इसकी शुरुआत हुई।

School Ruar 2025 JharkhandBack to School Campaign Ranchi
राँची में ‘स्कूल रूआर 2025’ का शुभारंभ

अभियान का उद्देश्य: हर बच्चे को स्कूल से जोड़ना

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य 5 से 18 वर्ष के सभी बच्चों को स्कूल से जोड़ना, उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करना और ड्रॉपआउट दर को न्यूनतम स्तर तक लाना है। “रूआर” का अर्थ है “फिर से लौटना”, जो इस कार्यक्रम की भावना को दर्शाता है — यानी शिक्षा से वंचित बच्चों को फिर से मुख्यधारा में लाना।

उपायुक्त का आह्वान: शिक्षक और जनप्रतिनिधि निभाएं जिम्मेदारी

अपने संबोधन में उपायुक्त ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए केवल प्रशासनिक प्रयास पर्याप्त नहीं, बल्कि शिक्षकों और जनप्रतिनिधियों को भी अपनी नैतिक जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षक समाज निर्माण के आधार स्तंभ हैं और उनका समर्पण ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखता है।

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झारखंड में स्कूल ड्रॉपआउट रोकने की मुहिम शुरू

विद्यालयों में 100% नामांकन और ठहराव सुनिश्चित करने का निर्देश

कार्यक्रम में उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सभी बच्चों का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया जाए। केवल नामांकन ही नहीं, बल्कि बच्चों की उपस्थिति, ठहराव और उच्च कक्षाओं में स्थानांतरण (transition) को भी प्राथमिकता दी जाए।

गुणवत्ता पर विशेष ध्यान: वार्षिक मूल्यांकन और कार्रवाई की चेतावनी

उपायुक्त ने कहा कि शिक्षकों के प्रदर्शन का वार्षिक मूल्यांकन होगा। यदि गुणवत्ता में सुधार नहीं दिखा, तो संबंधित विद्यालयों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि 90 प्रतिशत से अधिक बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ते हैं, इसलिए शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार अत्यावश्यक है।

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झारखंड में शिक्षा सुधार की बड़ी पहल

सामूहिक सहभागिता से बनेगा बदलाव

उपायुक्त ने जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों से भी अपील की कि वे भी अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। जो बच्चे अब तक स्कूल नहीं आ रहे हैं, उन्हें प्रोत्साहित कर स्कूल भेजें और उनका नामांकन कराएं। यह सामूहिक प्रयास ही शिक्षा में गुणात्मक सुधार लाएगा।

अन्य कार्यक्रम: CT बजाओ अभियान 2.0 और IDEAL NEP 2020 की भी शुरुआत

कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त ने “सीटी बजाओ अभियान 2.0 ASPIRE” और “IDEAL – NEP 2020” का भी शुभारंभ किया। इस पहल के तहत रांची जिला राज्य का पहला ऐसा जिला बन गया है जहाँ प्राथमिक कक्षाओं में एक्टिविटी आधारित शिक्षा लागू की गई है।

जागरूकता और प्रचार-प्रसार पर जोर

“स्कूल रूआर 2025” के तहत विभिन्न जागरूकता अभियानों का आयोजन किया जा रहा है — जिनमें नुक्कड़ नाटक, घर-घर संपर्क, सामुदायिक बैठकें और जागरूकता रैलियां शामिल हैं। इसका उद्देश्य अधिक से अधिक बच्चों और अभिभावकों को शिक्षा के महत्व से जोड़ना है।

गैर-नामांकित बच्चों की पहचान और पुनः नामांकन

जिले में 2025-26 तक 1003 ऐसे बच्चों की पहचान की गई है जो अभी तक किसी भी विद्यालय में नामांकित नहीं हैं। इन बच्चों का नामांकन कराना और उनके ठहराव को सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की प्राथमिकता में है।

अभियान का समयबद्ध संचालन

यह विशेष अभियान 10 मई 2025 तक चलेगा, जिसके अंतर्गत शिक्षा विभाग के विभिन्न स्तरों — राज्य, जिला, प्रखंड और विद्यालय स्तर पर — समन्वय बनाकर कार्य किया जा रहा है।

शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊर्जा

“स्कूल रूआर 2025” सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि शिक्षा की अलख जगाने का संकल्प है। रांची जिले की यह पहल पूरे झारखंड के लिए एक प्रेरणा बन सकती है। अगर जनप्रतिनिधि, शिक्षक और समाज मिलकर कार्य करें, तो यह संभव है कि एक भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे।

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