वरिष्ठ वामपंथी नेता बास्ता सोरेन का निधन, झारखंड की जनराजनीति को अपूरणीय क्षति
क्रांतिकारी आदिवासी नेता और पूर्व विधायक रहे बास्ता सोरेन का निधन, सीपीआई और भाकपा (माले) ने जताया शोक
मुख्य बिंदु:
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घाटशिला के पूर्व विधायक और आदिवासी जननेता थे बास्ता सोरेन
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1962–1967 के बीच झारखंड विधानसभा में रहे सदस्य
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वंचितों, श्रमिकों और किसानों के अधिकारों की आवाज बने
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जीवनभर संघर्ष, ईमानदारी और विचारधारा के प्रतीक रहे
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भाकपा (माले) ने दी क्रांतिकारी श्रद्धांजलि, जताया गहरा दुख
आदिवासी, श्रमिक और किसान हितों के योद्धा थे बास्ता सोरेन
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) के वरिष्ठ नेता कॉमरेड बास्ता सोरेन के निधन की खबर से झारखंड की वामपंथी राजनीति और जन आंदोलनों में शोक की लहर दौड़ गई है। उनके निधन को भाकपा (माले) झारखंड राज्य कमिटी ने वामपंथी, जनपक्षीय और लोकतांत्रिक आंदोलन के लिए एक गहरी क्षति बताया है।
घाटशिला से विधायक और आजीवन संघर्षशील नेता
भाकपा (माले) के राज्य सचिव मनोज भक्त ने कहा कि कॉमरेड बास्ता सोरेन 1962 से 1967 तक घाटशिला विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे। वे उस दौर के अग्रणी आदिवासी नेताओं में गिने जाते थे, जिन्होंने आदिवासी समाज, श्रमिकों और किसानों के हक में आजीवन संघर्ष किया। वे न केवल एक जनप्रतिनिधि थे, बल्कि शोषितों और वंचितों की बुलंद आवाज भी थे।
सादगी, विचारधारा और जनता के साथ जुड़ाव का उदाहरण
बास्ता सोरेन का पूरा जीवन सादगी, संघर्ष और वैचारिक प्रतिबद्धता का उदाहरण रहा। उन्होंने हमेशा जनराजनीति में ईमानदारी, वैचारिक निष्ठा और जनता से जुड़े रहने को सर्वोपरि माना। ऐसे दौर में जब राजनीति में अवसरवाद और स्वार्थ की प्रवृत्ति हावी होती जा रही है, उनकी विचारधारा और जीवनशैली एक प्रेरणा है।
वामपंथी राजनीति को गहरी क्षति
भाकपा (माले) झारखंड राज्य कमिटी ने उन्हें क्रांतिकारी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका जाना वामपंथी आंदोलन के लिए अपूरणीय क्षति है। पार्टी ने उनके परिवारजनों, साथियों और शुभचिंतकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है।
