मजदूरों के भाग्यविधाता बन चुके हैं ठेकेदार : सरयू राय
मजदूर दिवस पर बोले – असंगठित मजदूरों को नहीं मिलती सुरक्षा, सरकारें उदासीन
जमशेदपुर, 1 मई – जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय ने गुरुवार को मिलानी हॉल, बिष्टुपुर में आयोजित मजदूर सम्मान समारोह सह कार्यकर्ता सम्मेलन में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की बदहाल स्थिति पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज के दौर में ठेकेदार ही मजदूरों के भाग्यविधाता बन गए हैं, लेकिन उन्हें उनके श्रम के बदले सामाजिक सुरक्षा नहीं मिल रही।

संगठित बनाम असंगठित क्षेत्र: मजदूरों की संख्या में असंतुलन
सरयू राय ने कहा कि उदारीकरण के बाद संगठित क्षेत्र के मजदूरों की संख्या लगातार घटती गई है, जबकि असंगठित मजदूरों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि हुई है। ठेका मजदूरों की दशा तो और भी खराब है। उन्हें पीएफ, ईएसआई और अन्य मूलभूत अधिकारों से भी वंचित रखा जाता है।
सरकारें मजदूरों की नहीं सुनतीं
सरयू राय ने राज्य और केंद्र सरकारों की मजदूरों के प्रति उदासीनता पर सवाल उठाते हुए कहा कि नीति निर्धारकों के पास मजदूरों के लिए सहृदयता नहीं है। उन्होंने कहा कि जब यूनियनें उनकी आवाज नहीं उठातीं, तब हमें राजनीतिक दलों के नाते उनकी लड़ाई लड़नी चाहिए।

बदलती परिभाषा: स्किल और बौद्धिक श्रम भी मजदूरी
उन्होंने मजदूरों की परिभाषा के बदलाव पर चर्चा करते हुए कहा कि आज स्किल डेवलपमेंट और बौद्धिक श्रम भी मजदूरी की श्रेणी में आता है। ऐसी मजदूरी करने वालों को भी समान हक मिलने चाहिए।
कंपनियों की नैतिकता पर सवाल
सरयू राय ने कहा कि जमशेदपुर की कई कंपनियां उत्पादन बंद कर मजदूरों को बाहर का रास्ता दिखा देती हैं। कंपनियां स्वयं यूनियन बना लेती हैं और जब वे आवाज उठाती हैं, तो मान्यता रद्द करवा देती हैं। यह लोकतंत्र और श्रमिक अधिकारों पर हमला है।
“मजदूरों की हालत बेहद खराब, बड़ा आंदोलन जरूरी” – खीरू महतो
राज्यसभा सांसद बोले – न्यूनतम मजदूरी तय करते वक्त मजदूरों से नहीं ली जाती राय
जनता दल (यूनाइटेड) के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष और राज्यसभा सदस्य खीरू महतो ने समारोह में कहा कि देश में असंगठित मजदूरों की हालत बद से बदतर हो चुकी है। आउटसोर्सिंग कंपनियों के कारण मजदूरी में असमानता बढ़ी है और सरकारें इसे लेकर गंभीर नहीं हैं।
मजदूरी निर्धारण मनमर्जी से होता है
उन्होंने कहा कि न्यूनतम मजदूरी तय करते वक्त मजदूरों की कोई भागीदारी नहीं होती। नतीजा यह है कि कंपनियां अपने मन से वेतन तय करती हैं और शोषण को बढ़ावा मिलता है।
मजदूरों को शिक्षित और संगठित करने की जरूरत
खीरू महतो ने कहा कि मजदूरों को अपने अधिकारों की जानकारी नहीं होती। कई बार उनका पैसा सरकारों के पास जमा होता है लेकिन जानकारी के अभाव में वे उसे नहीं निकाल पाते। उन्होंने असंगठित मजदूरों के लिए आइडेंटिटी कार्ड जारी करने की मांग की।
सरयू राय की तारीफ
खीरू महतो ने कहा, “सरयू राय जी को देखकर लगता है कि हमारे बीच नीतीश कुमार बैठे हैं। वे न केवल जागरूक हैं बल्कि मजदूरों के प्रति संवेदनशील भी हैं।”
समापन और सम्मान समारोह
इस मौके पर जनता दल (यूनाइटेड) के जिलाध्यक्ष से लेकर युवा नेताओं, महिला कार्यकर्ताओं और कई संगठनों से आए प्रतिनिधियों का सम्मान किया गया। कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख नेताओं में सुबोध श्रीवास्तव, निर्मल सिंह, अजय कुमार, बीरेंद्र पासवान, असीम पाठक, अमृता मिश्रा समेत सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल थे।
