🔴 मुख्य बिंदु (Major Points):
-
बाबूलाल मरांडी ने झारखंड सरकार पर लगाया गंभीर आरोप
-
कहा – बेटे का शव लेने के लिए मां को बेचनी पड़ी ज़मीन
-
अस्पताल ने 40 हज़ार रुपये न देने पर शव देने से किया इनकार
-
मरांडी बोले – हेमंत सरकार पूरी तरह संवेदनहीन हो चुकी है
-
अस्पताल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई की मांग
भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी का हमला – “बेटे का शव लेने के लिए मां को बेचनी पड़ी ज़मीन”
सरकार के संवेदनहीन रवैये पर उठाए सवाल
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने एक दुखद घटना का ज़िक्र करते हुए कहा कि एक असहाय मां को अपने बेटे का शव अस्पताल से लेने के लिए अपनी जमीन तक बेचनी पड़ी। यह घटना हेमंत सरकार की संवेदनहीनता का जीवंत प्रमाण है।
अस्पताल ने थमाया 40 हज़ार रुपये का बिल
मरांडी ने बताया कि सड़क हादसे में घायल बेटे का इलाज कराने के लिए मां ने हरसंभव कोशिश की। इलाज के बाद जब बेटे की मौत हो गई, तो अस्पताल ने 40 हज़ार रुपये का बिल थमा दिया। पैसे नहीं होने की स्थिति में अस्पताल ने शव सौंपने से साफ इनकार कर दिया।

मजबूरी में बेचना पड़ी ज़िंदगी की आखिरी पूंजी
मरांडी के अनुसार, मजबूरी में उस मां ने अपनी ज़िंदगी की आखिरी पूंजी यानी ज़मीन बेच दी, ताकि वह अपने बेटे का अंतिम संस्कार कर सके। यह घटना न केवल प्रशासन की नाकामी को दर्शाती है, बल्कि सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता की भी पोल खोलती है।
हेमंत सरकार पर लगाया काले धन का आरोप
मरांडी ने कहा कि काले धन के लालच ने हेमंत सरकार को पूरी तरह से संवेदनहीन बना दिया है। इस अमानवीय रवैये के लिए सरकार को शर्म आनी चाहिए।
अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग
उन्होंने मांग की कि यदि सरकार में नाममात्र की भी शर्म बची हो, तो तुरंत अस्पताल प्रबंधन पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी गरीब को इस तरह की यातना न झेलनी पड़े।

