अनुदान कटौती पर उबाल: 4 अप्रैल को पुतला दहन, 10 अप्रैल को राजभवन घेराव की चेतावनी
रांची, 2 अप्रैल 2026: राज्यभर के अनुदानित एवं वित्त रहित शिक्षण संस्थानों में अनुदान अस्वीकृति को लेकर शिक्षकों और प्रबंधन का आक्रोश तेज हो गया है। सर्वोदय बाल निकेतन उच्च विद्यालय, धुर्वा (रांची) में आयोजित राज्यस्तरीय बैठक में मोर्चा ने चरणबद्ध आंदोलन की घोषणा की। बैठक में 500 से अधिक प्राचार्य, प्रधानाचार्य और शिक्षक प्रतिनिधि शामिल हुए।
4 अप्रैल को राज्यव्यापी विरोध, शिक्षा सचिव का पुतला दहन
सबसे पहले, मोर्चा ने 4 अप्रैल 2026 को पूरे राज्य में 600 अनुदानित और 1250 वित्त रहित संस्थानों के साथ विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है। इस दौरान शिक्षा सचिव, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग का पुतला दहन किया जाएगा। साथ ही, मुख्यमंत्री के नाम उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए परिवाद पत्र सौंपा जाएगा।

दोहरे मापदंड का आरोप, जांच की मांग
मोर्चा ने आरोप लगाया कि अनुदान वितरण में दोहरा मापदंड अपनाया गया है। कुछ संस्थानों को बिना जांच के अनुदान दिया गया, जबकि अधिकांश स्कूलों और कॉलेजों के अनुदान रोक दिए गए। इसके अलावा, 223 संस्थानों का अनुदान शासी निकाय, बंधक विलेख, उपयोगिता प्रमाण पत्र और शपथ पत्र के आधार पर काट दिया गया, जबकि ये सभी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड किए गए थे। मोर्चा के अनुसार, विभागीय पोर्टल की तकनीकी गड़बड़ी के कारण दस्तावेज गायब हुए, जिसकी जिम्मेदारी संस्थानों की नहीं है।

10 अप्रैल को राजभवन के समक्ष महाधरना
इसके बाद, 10 अप्रैल को राजभवन के सामने विशाल महाधरना आयोजित किया जाएगा। महाधरना के उपरांत राज्यपाल को ज्ञापन सौंपकर अनुदान कटौती की उच्च स्तरीय जांच की मांग की जाएगी। साथ ही, 12 अप्रैल को मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और शिक्षा सचिव को भी ज्ञापन दिया जाएगा।

विधायकों से समर्थन जुटाने की रणनीति
मोर्चा ने 15 अप्रैल तक 25 विधायकों से मुख्यमंत्री के नाम पत्र लिखवाकर अनुदान वितरण में हुई गड़बड़ी की जांच की मांग करने की योजना बनाई है। यदि इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई, तो अप्रैल के अंतिम सप्ताह में मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।
जनजातीय क्षेत्रों के साथ भेदभाव का आरोप
मोर्चा ने आरोप लगाया कि जनजातीय बहुल तीन जिलों में अनुदान राशि जानबूझकर लैप्स कर दी गई। इन क्षेत्रों में अधिकांश छात्र आदिवासी और पिछड़े वर्ग से आते हैं। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भी खूंटी और पश्चिमी सिंहभूम जिलों की राशि लैप्स हुई थी, जो संघर्ष के बाद आठ महीने में जारी हुई थी।
पोर्टल गड़बड़ी और नीति बदलाव से बढ़ी समस्या
बैठक में यह भी कहा गया कि पहले जनजातीय क्षेत्रों के लिए ‘B कॉलम’ उपलब्ध था, लेकिन इस वर्ष इसे हटाया गया। बाद में विरोध के बाद इसे जोड़ा गया, तब तक कई संस्थान आवेदन कर चुके थे, जिससे उन्हें जनजातीय उप योजना का लाभ नहीं मिल सका।
158 बिहार मान्यता प्राप्त स्कूलों का अनुदान रोकने का निर्णय विवादित
मोर्चा ने 158 बिहार से स्थापना अनुमति प्राप्त स्कूलों के अगले वित्तीय वर्ष से अनुदान रोकने के निर्णय को भी गलत बताया। उनका कहना है कि यह 2004 के अधिनियम की धाराओं के विपरीत है।
शिक्षकों में आक्रोश, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
बैठक में शिक्षकों ने सरकार पर वित्त रहित संस्थानों को समाप्त करने की साजिश का आरोप लगाया। नेताओं—गणेश महतो, अरविंद सिंह, देवनाथ सिंह, मनीष कुमार, डालेश चौधरी, मनोज तिर्की, फजलुल कादरी अहमद और हरिहर प्रसाद कुशवाहा—ने स्पष्ट किया कि 223 संस्थानों का अनुदान स्वीकृत होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रमंडल स्तर पर भी होगा धरना
इसके अलावा, 10 अप्रैल के बाद प्रमंडल स्तर पर आयुक्त कार्यालयों के समक्ष धरना दिया जाएगा और उनके माध्यम से मुख्यमंत्री को मांग पत्र भेजा जाएगा।
निष्कर्ष: “अंतिम दम तक संघर्ष”
मोर्चा के नेता रघुनाथ सिंह ने कहा कि अनुदान बहाली तक संघर्ष जारी रहेगा और आवश्यकता पड़ने पर पूरे राज्य में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। बैठक की अध्यक्षता चंदेश्वर पाठक ने की, जबकि संचालन गणेश महतो ने किया। प्रेस को जानकारी मनीष कुमार ने दी।
(रिपोर्ट: विशेष संवाददाता)

