RKDF का द्वितीय दीक्षांत समारोह सम्पन्न, 636 विद्यार्थियों को डिग्री एवं 16 को स्वर्ण पदक.

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आरकेडीएफ विश्वविद्यालय का द्वितीय दीक्षांत समारोह संपन्न, 636 विद्यार्थियों को डिग्रियां और 16 को स्वर्ण पदक प्रदान

रांची, 6 दिसंबर 2025आरकेडीएफ विश्वविद्यालय, रांची का द्वितीय दीक्षांत समारोह शनिवार को नामकुम स्थित मुख्य कैंपस में गरिमामय माहौल के बीच आयोजित हुआ। समारोह का शुभारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन और गणेश वंदना से किया गया।

मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति से सजा समारोह

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संजय कुमार वर्मा, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, मेकॉन लिमिटेड उपस्थित रहे।
गेस्ट ऑफ ऑनर के रूप में प्रदीप कुमार हजारी, विशेष सचिव–सह–सलाहकार, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग, झारखंड सरकार शामिल हुए।
इसके अलावा प्रोफेसर (डॉ.) कृति भूषण दास, कुलपति, सीयूजे भी समारोह में उपस्थित रहे और विद्यार्थियों को संबोधित किया।

636 विद्यार्थियों को डिग्री, 16 को स्वर्ण पदक

समारोह में पीएचडी, स्नातकोत्तर, स्नातक तथा डिप्लोमा पाठ्यक्रमों के कुल 636 विद्यार्थियों को उपाधियाँ प्रदान की गईं, जबकि 16 विद्यार्थियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
विशिष्ट उपलब्धियों पर कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) शुचितांगशु चटर्जी ने सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए सम्मानित किया।

कुलपति ने कहा—”सफलता को धन से न आँकें, समाज में बदलाव लाएँ”

अपने संबोधन में आरकेडीएफ विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर डॉ. शुचितांगशु चटर्जी ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि सफलता का वास्तविक मापदंड धन नहीं, बल्कि समाज में किया गया सकारात्मक परिवर्तन है। उन्होंने कहा—
“जो शिक्षा आप यहाँ प्राप्त कर रहे हैं उसका उद्देश्य केवल नौकरी ढूँढना नहीं, बल्कि ऐसे युवा तैयार करना है जो स्वयं रोजगार सृजित कर सकें।”
उन्होंने यह भी कहा कि ज्ञान केवल डिग्री तक सीमित नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का स्थायी हिस्सा होता है, जो भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सहायक होता है।

सीयूजे के कुलपति डॉ. कृति भूषण दास ने की विद्यार्थियों की मेहनत की सराहना

प्रोफेसर (डॉ.) कृति भूषण दास ने सभी डिग्रीधारकों को बधाई देते हुए कहा कि सफलता किसी शॉर्टकट का परिणाम नहीं, बल्कि निरंतर परिश्रम और परिवार के सहयोग से प्राप्त होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने माता-पिता और शिक्षकों के योगदान को हमेशा याद रखें।

गेस्ट ऑफ ऑनर प्रदीप हजारी ने कहा—”चरित्र ही मनुष्य की सबसे बड़ी पूंजी”

अपने संबोधन में श्री प्रदीप कुमार हजारी ने विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धा के इस युग में ईमानदारी और अनुशासन बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि चरित्र ही व्यक्ति को मंजिल तक पहुँचाता है और हर अवसर को पहचानकर आगे बढ़ना युवाओं के लिए अत्यंत आवश्यक है।

मुख्य अतिथि संजय कुमार वर्मा ने विद्यार्थियों को दी भविष्य की शुभकामनाएँ

मुख्य अतिथि ने विद्यार्थियों को जीवन के अगले चरण में प्रवेश करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि उपाधि प्राप्त करने के बाद युवाओं की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।
“उम्मीद है कि आप सब अपने ज्ञान और कौशल का उपयोग राष्ट्र निर्माण और समाज के विकास में करेंगे,” उन्होंने कहा।

“जीवन का नया अध्याय शुरू हो रहा है” — डॉ. बी.एन. सिंह

आरकेडीएफ विश्वविद्यालय, भोपाल के डायरेक्टर जनरल मैनेजर डॉ. बी.एन. सिंह ने विद्यार्थियों से कहा कि शिक्षा का यह अध्याय पूरा कर वे जीवन की नई दिशा में कदम रख रहे हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने लक्ष्य निर्धारित करें और ज्ञान का उपयोग समाजहित में करें।

“सात साल पहले बोया गया बीज आज वटवृक्ष बना” — कुलसचिव डॉ. अमित कुमार पांडे

धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अमित कुमार पांडे ने कहा कि जिस सपने को सात वर्ष पहले एक पौधे की तरह लगाया गया था, वह आज एक बड़े वृक्ष के रूप में सामने है। उन्होंने कहा—
“आज हमारे सामने प्रतिभाशाली और सक्षम विद्यार्थी खड़े हैं, जिनकी सफलता विश्वविद्यालय की पहचान है।”

उन्होंने सभी संकाय सदस्यों, कर्मचारियों, छात्रों और अभिभावकों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का समापन

द्वितीय दीक्षांत समारोह का समापन विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा समापन की घोषणा के साथ हुआ। कार्यक्रम का संचालन लॉ विभाग के प्रोफेसर अमित झा ने किया। समारोह में विश्वविद्यालय की सभी संकायों के प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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