झारखंड सरकार का बड़ा फैसला
रांची- बिहार में महिला डॉक्टर डॉ. नुसरत प्रवीण के साथ हुई अमानवीय घटना के बाद झारखंड की महागठबंधन सरकार ने एक ऐसा निर्णय लिया है, जिसकी देशभर में चर्चा हो रही है। इस घटना को लेकर समाज में गहरी नाराज़गी और संवैधानिक मूल्यों पर बहस तेज थी, उसी बीच झारखंड सरकार का यह कदम चर्चा का विषय बना हुआ है।
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में स्पष्ट संदेश
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में राज्य सरकार ने साफ कर दिया है कि झारखंड में महिलाओं, डॉक्टरों और अल्पसंख्यकों के सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि किसी महिला की गरिमा पर हमला, सीधे तौर पर संविधान और इंसानियत पर हमला है।
स्वास्थ्य मंत्री का मानवीय हस्तक्षेप
स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने इस पूरे मामले को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए इसे केवल एक नियुक्ति नहीं, बल्कि “सम्मान की जीत” बताया है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार पीड़ित डॉक्टर के साथ खड़ी है और यह फैसला पूरे देश के लिए एक सकारात्मक संदेश है।
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डॉ. नुसरत प्रवीण को मिली बड़ी राहत
झारखंड सरकार द्वारा डॉ. नुसरत प्रवीण को राज्य में सम्मानजनक शर्तों पर सेवा देने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके तहत उन्हें
₹3 लाख मासिक वेतन
स्थायी सरकारी नौकरी
मनचाही पोस्टिंग
सरकारी आवास की सुविधा
पूर्ण सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य वातावरण
प्रदान किया जाएगा।
‘नियुक्ति नहीं, सम्मान की मिसाल’
सरकार और स्वास्थ्य मंत्री दोनों ने इस फैसले को प्रशासनिक निर्णय से आगे बढ़कर सामाजिक संदेश बताया है। उनका कहना है कि जहां एक ओर महिला डॉक्टर के साथ अपमान हुआ, वहीं झारखंड ने संवैधानिक मूल्यों और इंसानियत के पक्ष में खड़े होकर उदाहरण पेश किया है।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा
इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में व्यापक चर्चा है। कई लोग इसे महिला सुरक्षा, डॉक्टरों के सम्मान और समावेशी शासन की दिशा में एक मजबूत कदम मान रहे हैं। झारखंड सरकार का यह निर्णय आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी नजीर बन सकता है।
