रांची में दुर्लभ हार्ट सर्जरी से बची युवक की जान
पारस एचईसी अस्पताल में ‘रप्चर्ड साइनस ऑफ वलसाल्वा’ का सफल ऑपरेशन
रांची: राजधानी रांची के Paras HEC Hospital में एक अत्यंत जटिल और जानलेवा हृदय रोग से पीड़ित युवक की सफल सर्जरी कर चिकित्सकों ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। 30–32 वर्षीय युवक ‘रप्चर्ड साइनस ऑफ वलसाल्वा’ (Ruptured Sinus of Valsalva) नामक दुर्लभ जन्मजात हृदय रोग से ग्रसित था। समय पर सर्जरी नहीं होने की स्थिति में यह बीमारी अचानक मृत्यु का कारण बन सकती थी।
क्या है ‘रप्चर्ड साइनस ऑफ वलसाल्वा’?
चिकित्सकों के अनुसार, इस बीमारी में शरीर की मुख्य धमनी ‘एओर्टा’ (Aorta) की दीवार पर गुब्बारे जैसा उभार बन जाता है। जब यह उभार फट जाता है तो खून का रिसाव हृदय के किसी अन्य चैंबर में होने लगता है। इस मामले में धमनी से रिसाव दिल के राइट एट्रियम चैंबर में हो रहा था, जिससे हृदय पर असामान्य दबाव बढ़ रहा था और मरीज की स्थिति बेहद नाजुक हो गई थी।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह बीमारी जन्मजात होती है और कई बार लंबे समय तक लक्षण स्पष्ट नहीं होते। लेकिन जैसे ही धमनी फटती है, मरीज की जान पर सीधा खतरा मंडराने लगता है।
आर्थिक कारणों से रुका इलाज, फिर मिला जीवनदान
जानकारी के मुताबिक, युवक पहले एक अन्य अस्पताल में इलाज के लिए गया था, लेकिन आर्थिक कारणों से वहां उपचार संभव नहीं हो पाया। इसके बाद उसे रांची स्थित पारस एचईसी अस्पताल लाया गया। यहां विस्तृत जांच के बाद डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल इमरजेंसी सर्जरी का निर्णय लिया।
डॉ. कुणाल हजारी और टीम की बड़ी कामयाबी
अस्पताल के वरिष्ठ सीटीवीएस सर्जन Dr. Kunal Hazari और उनकी टीम ने जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। सर्जरी के दौरान फटी हुई धमनी की मरम्मत की गई। साथ ही दिल के तीन प्रमुख वाल्व — एओर्टिक, माइट्रल और ट्राइकसपिड — की भी सफल रिपेयर की गई।
डॉ. हजारी ने बताया कि उनके लगभग 27–28 वर्षों के अनुभव में झारखंड में पिछले 17–18 वर्षों के दौरान यह इस तरह का 10वां सफल केस है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले 2–3 वर्षों में मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकेगा और संभव है कि दवाओं पर निर्भरता भी समाप्त हो जाए।
पांचवें दिन अस्पताल से छुट्टी, एक माह बाद पूरी तरह स्वस्थ
ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति लगातार बेहतर होती गई। सर्जरी के पांचवें दिन उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। एक माह बाद जब वह दवा परिवर्तन और टांके हटाने के लिए दोबारा अस्पताल पहुंचा, तो चिकित्सकों ने उसे पूरी तरह स्वस्थ पाया।
अत्याधुनिक सुविधाओं से जटिल सर्जरी संभव
अस्पताल के फैसिलिटी डायरेक्टर Dr. Nitesh Kumar ने बताया कि आधुनिक तकनीक और अनुभवी डॉक्टरों की टीम के कारण जटिल से जटिल हृदय सर्जरी भी सफलतापूर्वक की जा रही है। उन्होंने कहा कि अस्पताल की प्राथमिकता आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को भी उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है।
उन्होंने बताया कि Ayushman Bharat जैसी सरकारी योजनाओं के माध्यम से जरूरतमंद मरीजों को राहत दी जा रही है, ताकि गंभीर बीमारियों का इलाज आर्थिक बाधा के कारण न रुके।
झारखंड में चिकित्सा क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत
यह सफल सर्जरी न केवल अस्पताल बल्कि झारखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए भी एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच, आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ टीम के सहयोग से अब राज्य में भी दुर्लभ और जटिल हृदय रोगों का इलाज संभव हो पा रहा है।
इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि सही समय पर सही इलाज मिलने से गंभीर से गंभीर बीमारी पर भी विजय पाई जा सकती है।
