रांची बंद: सिरमटोली फ्लाईओवर रैम्प हटाने की मांग को लेकर आदिवासी संगठनों का प्रदर्शन
रांची: सिरमटोली फ्लाईओवर रैम्प को हटाने की मांग को लेकर केन्द्रीय सरना समिति और चडरी सरना समिति के नेतृत्व में विभिन्न आदिवासी संगठनों ने पूर्व घोषित रांची बंद का आयोजन किया। इस बंद के दौरान हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और विरोध प्रदर्शन किया।
सरना धर्मावलंबियों का एकजुट प्रदर्शन
केन्द्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने कहा कि पूरे रांची में सरना धर्मावलंबियों ने सड़क पर उतरकर अपनी ताकत दिखाई। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सरना समाज के धार्मिक स्थल की रक्षा के लिए है और समाज पूरी तरह से एकजुट है।

तीन महीनों से जारी विरोध प्रदर्शन
सिरमटोली फ्लाईओवर रैम्प को हटाने की मांग को लेकर आदिवासी संगठन पिछले तीन महीनों से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। झारखंड विधानसभा में भी इस मुद्दे को उठाया गया, और विधानसभा अध्यक्ष ने इस पर जांच समिति बनाने की बात कही थी, लेकिन अब तक समाधान नहीं निकला है। इस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की चुप्पी को लेकर भी नाराजगी जताई गई।
व्यापारिक प्रतिष्ठान और परिवहन पर असर
बंद के दौरान व्यवसायिक प्रतिष्ठानों, बस, ऑटो और ई-रिक्शा सेवाएं ठप रहीं। विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी इस बंद को समर्थन दिया।
सरना स्थल से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं – जगलाल पहान
मुख्य पाहन जगलाल पाहन ने कहा कि सरना स्थल से छेड़छाड़ आदिवासी समाज के लिए असहनीय है, और इसके खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी।
शांतिपूर्ण तरीके से बंद को सफल बनाया
चडरी सरना समिति के प्रधान महासचिव सुरेंद्र लिंडा ने बताया कि उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं के साथ शांतिपूर्ण तरीके से लाइन टैंक रोड, अल्बर्ट एक्का चौक, सर्जना चौक, डेली मार्केट चौक, शहीद चौक, अपर बाजार, महावीर चौक और सुभाष चौक सहित कई इलाकों में प्रतिष्ठान बंद कराए।
प्रमुख लोग रहे मौजूद
इस बंदी में केन्द्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा, जगलाल पहान, सुरेन्द्र लिंडा, झारखंड आंदोलनकारी कुमोद कुमार वर्मा, विकास संगा, प्रकाश मंडा, प्रेम लिंडा, नाइन लिंडा, बादल नायक, आशीष लिंडा, कैलाश मंडा, महादेव टोप्पो, अमर टोप्पो, पनीर मुंडा, मुन्ना हेमरोम, राहुल मुंडा, ओम वर्मा और हरिश कुमार सहित सैकड़ों लोग शामिल हुए।
केन्द्रीय सरना समिति ने सभी संगठनों, राजनीतिक दलों और बंद का समर्थन करने वाले लोगों का आभार व्यक्त किया और कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक सरना स्थल को सुरक्षित नहीं किया जाता।
