Dr Rupam Kumari RIMS topper

RIMS PG टॉपर लिस्ट में हेराफेरी का आरोप, AIIMS देवघर में गलत तरीके से सीट आवंटन.

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मुख्य बिंदु

  • 2025 में प्रकाशित RIMS PG टॉपर लिस्ट में हुई हेराफेरी

  • फिजियोलॉजी विभाग की टॉपर डॉ. रुपम कुमारी का नाम हटाया गया

  • डॉ. अंजलि सिन्हा को टॉपर बनाकर सीट दिलाई गई

  • स्वास्थ्य विभाग और RIMS से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं



मामला क्या है

रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (RIMS) की 2021-2024 बैच की PG परीक्षा जनवरी 2025 में हुई थी, जिसका परिणाम मार्च 2025 में प्रकाशित किया गया। परिणाम में सभी विभागों के टॉपरों की सूची विभिन्न अखबारों में भी छपी। इसी सूची के आधार पर AIIMS देवघर ने टॉपर छात्रों को सीनियर रेजिडेंट (S.R.) पद पर प्रवेश देने की प्रक्रिया शुरू की।

RIMS PG topper list scam
RIMS PG टॉपर लिस्ट में हेराफेरी!

आरोप: पैसे लेकर बदली गई टॉपर लिस्ट

सूत्रों के अनुसार, जब AIIMS देवघर ने RIMS टॉपरों की आधिकारिक सूची मांगी, तब स्वास्थ्य विभाग के क्लर्क ने सांठगांठ कर लिस्ट में हेराफेरी कर दी। इसमें क्रम संख्या 18, फिजियोलॉजी विभाग की टॉपर डॉ. रुपम कुमारी (71.13%) का नाम हटाकर, 68.05% अंक पाने वाली डॉ. अंजलि सिन्हा का नाम डाल दिया गया।

इसी तरह FMT विभाग के टॉपर डॉ. जयदीप कुमार चौधरी का नाम भी लिस्ट में शामिल नहीं किया गया।

RIMS PG 2025 result fraud
RIMS टॉपर लिस्ट में धांधली का आरोप

AIIMS देवघर में आवंटन

29 मई 2025 को AIIMS देवघर की आधिकारिक वेबसाइट पर RIMS PG 2025 टॉपरों की सूची अपलोड की गई। उसी आधार पर डॉ. अंजलि सिन्हा को S.R. सीट आवंटित कर दी गई। जब इस पर आपत्ति जताई गई तो AIIMS प्रशासन ने गोलमोल जवाब देते हुए कहा कि उन्हें सूची RIMS और झारखंड स्वास्थ्य विभाग से ही उपलब्ध कराई गई थी।

शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं

पीड़ित छात्रा ने RIMS के डीन, स्वास्थ्य विभाग और HRD विभाग को लिखित व ईमेल द्वारा शिकायत दी। लिस्ट सुधार की मांग भी की गई, लेकिन अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि क्लर्क और अन्य कर्मचारी शिकायत को दबा रहे हैं।

नियम का उल्लंघन और आर्थिक लाभ

गौरतलब है कि, PG एडमिशन के दौरान डॉ. अंजलि सिन्हा ने तीन साल का बॉन्ड भरा था, जिसमें स्पष्ट था कि PG के बाद उन्हें तीन वर्ष झारखंड सरकार की सेवा करनी होगी। नियम तोड़ने पर लगभग 60 लाख रुपये (30 लाख का मुआवजा और 30 लाख की छात्रवृत्ति-भत्ता राशि) लौटाना अनिवार्य है।

झारखंड सरकार में बॉन्ड पोस्टिंग वालों को ₹80,000 मासिक वेतन मिलता है, जबकि AIIMS देवघर में सीनियर रेजिडेंट को लगभग ₹1.5 लाख प्रतिमाह वेतन मिलता है। इसी आर्थिक लाभ के कारण दलालों की मदद से लिस्ट में हेरफेर कर नाम शामिल कराने का आरोप लग रहा है।

सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग

पूरे प्रकरण ने स्वास्थ्य विभाग, RIMS प्रशासन और AIIMS देवघर की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों का कहना है कि असली टॉपरों का भविष्य दांव पर लगा है और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

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