रघुवर दास की सक्रिय राजनीति में वापसी पर चर्चा गर्म
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास की सक्रिय राजनीति में वापसी को लेकर चर्चाएं तेज है। ओडिशा के राज्यपाल पद से इस्तीफा देने के बाद, रघुवर दास जल्द ही विधिवत राजनीति में वापसी करेंगे।
रघुवर दास के लिए तीन संभावित भूमिकाएं
- झारखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बनने की संभावना
रघुवर दास को झारखंड बीजेपी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। - भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने की चर्चा
उन्हें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामित किया जा सकता है। - राष्ट्रीय महामंत्री का दायित्व
तीसरा विकल्प यह है कि उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय महामंत्री बनाया जा सकता है।
झारखंड की राजनीति पर संभावित प्रभाव
अगर रघुवर दास झारखंड प्रदेश अध्यक्ष बनते हैं, तो राज्य की राजनीति पर इसका व्यापक असर पड़ सकता है। इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े हो गए हैं:
- आदिवासी नेताओं की स्थिति
चंपई सोरेन, बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा जैसे प्रमुख आदिवासी नेताओं की राजनीतिक स्थिति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।- क्या चंपई सोरेन का राजनीतिक करियर खतरे में पड़ेगा?
- बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा की भूमिकाएं क्या होंगी?
- गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री परंपरा
भाजपा पहले ही रघुवर दास को मुख्यमंत्री बनाकर गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री की परंपरा शुरू कर चुकी है। ऐसे में आदिवासी नेताओं का दबदबा कमजोर हो सकता है।
रघुवर दास की पिछली भूमिका और विवाद
रघुवर दास झारखंड के ऐसे इकलौते मुख्यमंत्री रहे हैं, जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा किया।
- स्थानीय नीति पर विवाद
1985 के आधार पर परिभाषित स्थानीय नीति का व्यापक विरोध हुआ। - सीएनटी-एसपीटी एक्ट पर आलोचना
सीएनटी और एसपीटी एक्ट को लेकर उनके रुख की तीखी आलोचना हुई। - लैंड बैंक योजना पर सवाल
उनकी लैंड बैंक योजना भी विवादों में रही।
भाजपा के लिए क्यों जरूरी हैं रघुवर दास?
2024 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को करारी हार का सामना करना पड़ा। पार्टी में संगठनात्मक मायूसी है। ऐसे में रघुवर दास को नेतृत्व में लाकर संगठन को मजबूत करना भाजपा की जरूरत बन गई है। रघुवर दास की राजनीति में वापसी भाजपा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी नियुक्ति किस भूमिका में होती है और इसका झारखंड की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।
