🔴 प्रमुख बिंदु
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सेरेंगदाग थाना क्षेत्र में युवक ने नाबालिग प्रेमिका की हत्या की
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हत्या के बाद युवक ने जंगल में जाकर की आत्महत्या
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पहाड़ मेला से लौटते समय दोनों के बीच हुआ था विवाद
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शवों की बरामदगी के बाद पुलिस ने शुरू की जांच
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पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए शव, परिजनों के बयान दर्ज
प्रेम संबंध का दुखद अंत
झारखंड के लोहरदगा जिले के सेरेंगदाग थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। एक 18 वर्षीय युवक ने अपनी 16 वर्षीय नाबालिग प्रेमिका की चाकू से गला रेतकर निर्मम हत्या कर दी। इसके बाद, वह जंगल की ओर भागा और वहीं पेड़ से लटककर आत्महत्या कर ली।
साथ गए थे मेले में, लौटते समय बिगड़े हालात
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक किशोरी अपनी मौसी के घर रहकर पढ़ाई कर रही थी। उसका युवक से प्रेम संबंध था और वे अक्सर मिलते रहते थे। शुक्रवार को इलाके में लगने वाले पारंपरिक “पहाड़ मेला” में दोनों एक साथ गए थे। हालांकि, मेले से लौटते वक्त किसी बात को लेकर उनके बीच तीखी बहस हो गई। गुस्से में युवक ने पास में मौजूद चाकू से लड़की का गला रेत दिया और वहां से फरार हो गया।
जंगल में मिली युवक की लाश
इस सनसनीखेज हत्या के बाद युवक कुछ दूरी पर स्थित जंगल में चला गया। वहां उसने पेड़ से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जब दोनों देर शाम तक अपने-अपने घर नहीं लौटे, तो परिजनों को चिंता हुई और उन्होंने खोजबीन शुरू की। अलग-अलग जगहों पर दोनों के शव मिलने के बाद परिजनों ने तत्काल इसकी सूचना सेरेंगदाग थाना को दी।
पुलिस जांच में जुटी, शव भेजे गए पोस्टमार्टम के लिए
सूचना मिलते ही सेरेंगदाग थाना प्रभारी रामाशीष यादव पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए लोहरदगा सदर अस्पताल भेजा गया है। थाना प्रभारी ने बताया कि परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और ग्रामीणों से पूछताछ में भी यही सामने आया है कि युवक ने पहले लड़की की हत्या की और फिर आत्महत्या कर ली।
एसपी ने दी जांच के निर्देश
लोहरदगा एसपी सादिक अनवर रिजवी ने कहा कि पुलिस ने घटना की सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई की और घटनास्थल की जांच की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है।
यह घटना न केवल एक प्रेम संबंध की त्रासदी है, बल्कि समाज के युवाओं में बढ़ती असहिष्णुता और मानसिक अस्थिरता की चिंताजनक तस्वीर भी प्रस्तुत करती है। ऐसे मामलों में परिवार और समाज की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है ताकि भावनात्मक निर्णयों की भयावह परिणति से युवाओं को रोका जा सके।
