केंद्र सरकार के 11 साल पर कांग्रेस का हमला: पूंजीपतियों की सेवा, जनता के अधिकारों का हनन — राकेश सिन्हा
मुख्य बिंदु:
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कांग्रेस ने कहा, भाजपा का “सेवा और समर्पण” पूंजीपतियों की सेवा और उनके आगे समर्पण का प्रतीक
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11 वर्षों में संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर हमला
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किसानों को आत्महत्या, पूंजीपतियों को ऋण माफी – दोहरी नीति का आरोप
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मणिपुर हिंसा को बताया भाजपा की प्रशासनिक विफलता
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रोजगार, महिला सुरक्षा, योजनाओं की असफलता पर उठाए सवाल
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नोटबंदी से लेकर महंगाई और गलत GST तक, गिनाईं आर्थिक विफलताएं
कांग्रेस प्रवक्ता राकेश सिन्हा का तीखा प्रहार
केंद्र की मोदी सरकार के 11 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में भाजपा द्वारा आयोजित “सेवा और समर्पण” कार्यक्रम पर तंज कसते हुए झारखंड प्रदेश कांग्रेस के महासचिव सह मीडिया प्रभारी राकेश सिन्हा ने कहा कि यह कार्यक्रम असल में देश के चंद पूंजीपति मित्रों की सेवा और उनके आगे समर्पण का संदेश देता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 11 वर्षों में मोदी सरकार ने कुछ गिने-चुने उद्योगपतियों के करीब जाकर आम जनता के हितों की बलि चढ़ाई है। उन्होंने कहा, “जब देश के अमीरों के 16 हजार करोड़ रुपये के कर्ज माफ हो जाते हैं और किसान 16 हजार के लिए आत्महत्या करने पर मजबूर होते हैं, तब भाजपा की ‘सेवा’ और ‘समर्पण’ की सच्चाई सामने आ जाती है।”
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संवैधानिक संस्थाओं को बताया निशाने पर
राकेश सिन्हा ने आगे कहा कि मोदी सरकार ने बीते एक दशक में देश की संवैधानिक संस्थाओं को लगातार कमजोर किया है। चुनावों में जनमत चुराकर, सरकारें गिराकर और विधायकों की खरीद-फरोख्त कर लोकतंत्र की आत्मा को ठेस पहुंचाई गई है। उन्होंने पूछा, “क्या यही भाजपा की सेवा है – जब लोकतंत्र को ही तहस-नहस किया जा रहा है?”
नफ़रत, हिंसा और भय का माहौल
देश में भय और असहिष्णुता के बढ़ते माहौल पर भी उन्होंने चिंता जताई। मणिपुर में लंबे समय से चल रही हिंसा को भाजपा की प्रशासनिक विफलता करार देते हुए उन्होंने कहा कि इस घटना ने सरकार की संवेदनशीलता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है।
रोज़गार, महिला सुरक्षा और योजनाओं पर उठे सवाल
भाजपा द्वारा हर साल दो करोड़ युवाओं को नौकरी देने के वादे को जुमला बताते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि आज वास्तविकता यह है कि नौकरियां छीनी जा रही हैं। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना पर कटाक्ष करते हुए सिन्हा बोले कि जब भाजपा के ही नेता महिलाओं के लिए खतरा बन जाएं, तो ऐसी योजना का क्या औचित्य रह जाता है?
आर्थिक मोर्चे पर सरकार की विफलताएं गिनाईं
राकेश सिन्हा ने नोटबंदी, महंगाई, भ्रष्टाचार, गलत जीएसटी व्यवस्था, असंगठित क्षेत्र पर प्रहार और अनियोजित लॉकडाउन को देश की आर्थिक रीढ़ तोड़ने वाला कदम बताया। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’, ‘स्टार्टअप इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’, ‘100 स्मार्ट सिटी’, ‘नमामि गंगे’ जैसी बड़ी घोषणाएं सिर्फ प्रचार का माध्यम बन कर रह गई हैं।
रेलवे और अन्य क्षेत्रों में गिरावट
उन्होंने आरोप लगाया कि रेलवे जैसी देश की महत्वपूर्ण सेवा प्रणाली को भी बर्बाद कर दिया गया है। सरकार के 11 वर्षों को “बेमिसाल” कहने को उन्होंने “झूठ का जाल” करार दिया और जनता से अपील की कि वह इन दिखावटी नारों से सावधान रहे।
