औरंगाबाद (Aurangabad ):- सात जन्मों का रिश्ता हैं शादी, जहां रश्म रिवाज़, गाजे -बाजे, मंडप और तरह -तरह के रस्म -रिवाज़ होते हैं.
लेकिन, बिहार के औरंगाबाद में एक ऐसी शादी हुई, जिसमे ऐसा कुछ नहीं दिखा बल्कि झट -पट शादी चुटकी भर सिंदूर दुल्हन को लगाकर ही संपन्न हो गई.
प्रेमी जोड़े की शादी
प्रेम विवाह के चलते कृष्ण और मालती ने परिवार वालों की मर्जी के खिलाफ शादी रचा ली.इसकी वजह थी, जाति का बंधन क्योंकि लड़का और लड़की अलग -अलग जाति से आते थे और परिवार वाले शादी के लिए रजामंद नहीं थे.
कृष्ण और लालती का विवाह
कृष्ण और लालती के बीच मोहब्बत थी, लेकिन उनकी राह में परिवार वाले अड़चन बने हुए थे.कृष्ण कुमार मदनपुर थाना इलाके के मंजरेठी गांव के रहने वाले हैं, जबकि लालती नवीनगर प्रखंड के माली गांव की रहने वाली. जब इस प्रेमी जोड़े को परिवार से रजामंदी नहीं मिली तो इसकी परवाह किये बिना और भगवान को साक्षी मानकर शादी कर ली.
मंदिर में हुई शादी
यह शादी मदनपुर के सरस्वती मोहल्ला के एक मंदिर में हुई. जहां सादगी से एक दूसरे को माला पहनाकर और भगवान को साक्षी मानकर जिंदगी साथ जीने का फैसला लिया. यहां न बैंड बाजा दिखा और न बारात और न ही कोई धूम धड़ाका. बस चुटकी भर सिंदूर से शादी हो गई.
शादी की काफ़ी चर्चा
जाति की दीवार तोड़कर एक प्रेमी जोड़े की शादी की काफ़ी चर्चा हो रही हैं. इसके साथ ही सवाल उठ रहा हैं कि किस तरह आज भी जाति का बंधन समाज में व्याप्त है.
