‘मंईयां सम्मान” के पोस्टर लगते रहे, बेटियां दरिंदगी की शिकार होती रहीं’

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मुख्य बिंदु 

  • रांची में आदिवासी किशोरी से गैंगरेप, दो आरोपी अब भी फरार

  • राफिया नाज़ ने कहा: झारखंड में महिला सुरक्षा केवल दिखावा

  • महिला आयोग 4 वर्षों से निष्क्रिय, 3,137 से अधिक मामले लंबित

  • NCRB आंकड़े: झारखंड में महिलाओं के खिलाफ अपराध चरम पर

  • “मइया सम्मान योजना” को बताया सिर्फ पोस्टरबाजी

  • हर जिले में महिला पुलिस चौकी और हेल्पलाइन की मांग



गैंगरेप की घटना से झकझोरा राज्य, राफिया नाज़ ने सरकार को घेरा

झारखंड की राजधानी रांची में हाल ही में एक आदिवासी किशोरी के साथ दिनदहाड़े गैंगरेप की घटना ने पूरे राज्य को हिला दिया है। किशोरी को बहला-फुसलाकर जंगल में ले जाया गया और उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। यह केवल एक isolated case नहीं है, बल्कि राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा की पोल खोलती है।

“महिलाएं असुरक्षित, सरकार मूकदर्शक”: राफिया नाज़

भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश प्रवक्ता राफिया नाज़ ने इस घटना की तीखी निंदा करते हुए कहा कि झारखंड की महिलाएं आज भय और असुरक्षा के साए में जीने को मजबूर हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार की तमाम घोषणाएं – जैसे “मइया सम्मान योजना” – केवल दिखावे तक सीमित रह गई हैं। धरातल पर महिलाएं न तो सुरक्षित हैं और न ही न्याय की उम्मीद कर सकती हैं।

महिला आयोग चार साल से निष्क्रिय, हजारों मामले लंबित

राफिया ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि झारखंड महिला आयोग सितंबर 2020 से निष्क्रिय है। न तो अध्यक्ष है, न कोई सदस्य। इस कारण 3,137 से अधिक मामलों की सुनवाई ठप है और हजारों पीड़िताएं इंसाफ के लिए दर-दर भटक रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया – जब संवैधानिक संस्थाएं ही बंद कर दी जाएं, तो सरकार की प्राथमिकता क्या है?

शिक्षकों के साथ अन्याय बंद करो! बाबूलाल ने सरकार के खिलाफ आवाज़ बुलंद की.

NCRB रिपोर्ट: झारखंड अपराधों में शीर्ष पर

राफिया ने NCRB के 2022 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि झारखंड दहेज उत्पीड़न में देशभर में पहले स्थान पर है – 1,844 केस। इसके अलावा बलात्कार, बालिका तस्करी, अपहरण और घरेलू हिंसा के मामलों में भी राज्य का रिकॉर्ड शर्मनाक है। 2022 में कुल 7,678 महिला अपराधों के केस दर्ज हुए, लेकिन अधिकांश में जाँच अब तक अधूरी है।

पीड़िताओं को न्याय नहीं, अपराधियों के हौसले बुलंद

बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि अधिकतर मामलों में FIR के बावजूद कार्रवाई नहीं होती। पीड़िताएं पुलिस थानों के चक्कर काटती हैं, लेकिन या तो उन्हें धमकाया जाता है या अनदेखा कर दिया जाता है। इससे अपराधियों का मनोबल और बढ़ता है।

सरकार के पास न मंशा है, न योजना: राफिया का आरोप

उन्होंने सवाल किया कि अगर सरकार वास्तव में महिला सम्मान और सुरक्षा को लेकर गंभीर होती, तो महिला आयोग का गठन अब तक कर चुकी होती, वृद्धाओं को पेंशन देती और हर जिले में महिला हेल्पलाइन स्थापित कर चुकी होती। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं आज भी पूरी तरह असहाय हैं।

राफिया की मांगें: महिला आयोग और फास्ट ट्रैक कोर्ट की स्थापना

राफिया नाज़ ने राज्य सरकार से माँग की कि महिला आयोग का तत्काल गठन किया जाए। साथ ही सभी जिलों में महिला हेल्पलाइन और महिला पुलिस चौकियाँ शुरू की जाएं, खासकर आदिवासी क्षेत्रों में। पीड़िताओं को फास्ट ट्रैक कोर्ट के ज़रिए त्वरित न्याय मिले और दोषियों को कठोर सजा दी जाए।

“भाजपा बनी रहेगी महिलाओं की आवाज़”

अंत में राफिया नाज़ ने कहा कि यदि हेमंत सरकार महिला सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकती, तो उसे सत्ता में बने रहने का नैतिक अधिकार नहीं है। भाजपा हमेशा महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध रही है और आगे भी आवाज़ बुलंद करती रहेगी।

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