प्रमुख बिंदु
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रोम के संत पेत्रुस महागिरजाघर में पोप लियो 14वें का पदग्रहण समारोह संपन्न हुआ।
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इस समारोह में पोप को पालियुम और मछुआरे की अंगूठी प्रदान की गई, जो काथलिक कलीसिया में महत्वपूर्ण धार्मिक प्रतीक हैं।
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पालियुम चरवाहे की भेड़ को कंधे पर उठाने के प्रतीक रूप में पहना जाता है और मछुआरे की अंगूठी संत पेत्रुस के विश्वास का चिन्ह है।
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समारोह की शुरुआत पोप के द्वारा संत पेत्रुस की कब्र पर प्रार्थना से हुई।
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अंत में पोप ने सभा को आशीर्वाद दिया और कलीसिया की एकता, प्यार और कृपा की प्रार्थना की।
पोप लियो 14वें के पदग्रहण की धर्मविधि का विस्तृत विवरण
रोम के प्रतिष्ठित संत पेत्रुस महागिरजाघर में पोप लियो 14वें ने अपनी प्रेरिताई पद की धर्मविधि के साथ शुरुआत की। इस धार्मिक समारोह ने संत पेत्रुस और उनकी शहादत के साथ गहरा संबंध स्थापित किया, जिनका योगदान रोम की कलीसिया के आधार के रूप में माना जाता है।

धर्मविधि के दौरान पोप लियो 14वें को दो महत्वपूर्ण धार्मिक प्रतीक—पालियुम और मछुआरे की अंगूठी प्रदान की गई। पालियुम, जो कि छह काले क्रूसों से सजाया गया है, चरवाहे द्वारा खोई हुई भेड़ को कंधे पर उठाने के प्रतीक के रूप में पहना जाता है। यह प्रभु के क्रूस की याद दिलाता है। वहीं, मछुआरे की अंगूठी संत पेत्रुस के विश्वास की मुहर है, जो उन्होंने येसु के आदेश पर मछलियाँ पकड़ने के बाद प्राप्त की थी।
धर्मविधि की शुरुआत संत पेत्रुस की कब्र पर प्रार्थना से हुई, जहां पोप ने आध्यात्मिक शक्ति ग्रहण की। उसके बाद सुसमाचार और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से पोप ने अपने आधिकारिक कर्तव्यों का शुभारंभ किया।
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समारोह के अंत में, पोप लियो 14वें ने सभा को आशीर्वाद दिया और प्रार्थना की कि ईश्वर कलीसिया को प्रेम, एकता और कृपा से भर दे। इस अनुष्ठान ने पोप लियो 14वें के प्रेरिताई काल की शुरूआत को पवित्र और प्रभावशाली बनाया।
