PESA Act Jharkhand

पेसा कानून बना सियासी बहस का मुद्दा, सरकार के दावे पर भाजपा की आपत्ति

झारखंड/बिहार ताज़ा ख़बर विधानसभा चुनाव

पेसा कानून से सशक्त होगा ग्राम स्वराज, लेकिन विपक्ष ने उठाए अमल और अधिकारों पर सवाल

रांची: मुख्यमंत्री Hemant Soren ने कहा है कि झारखंड में पेसा कानून लागू होने के बाद ग्राम स्वराज की अवधारणा को वास्तविक मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि अब ग्रामसभा और ग्राम पंचायतों के माध्यम से ग्रामीणों को अपने अधिकार सीधे तौर पर प्राप्त होंगे और जल, जंगल व जमीन से जुड़े फैसलों में उनकी निर्णायक भूमिका होगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पेसा कानून झारखंड के आदिवासी और ग्रामीण समाज के लिए केवल एक कानूनी प्रावधान नहीं, बल्कि उनके पूर्वजों के संघर्ष और स्वशासन की परंपरा का प्रतीक है। इस कानून के जरिए ग्रामीण अपने संसाधनों पर स्वयं निर्णय ले सकेंगे, जिससे स्थानीय स्वशासन की भावना और अधिक सशक्त होगी।

2026 का स्वागत: हेमंत सोरेन और बाबूलाल मरांडी ने राज्यवासियों को दी शुभकामनाएं

गांव-गांव तक पहुंचेगी पेसा की जानकारी

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का अगला लक्ष्य पेसा अधिनियम से जुड़ी जानकारी को हर गांव तक पहुंचाना है। इसके लिए राज्यभर में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि ग्रामीण अपने अधिकारों को न केवल समझ सकें, बल्कि उनका प्रभावी उपयोग भी कर सकें। उन्होंने कहा कि जब तक ग्रामसभा पूरी तरह जागरूक और सशक्त नहीं होगी, तब तक पेसा कानून का उद्देश्य अधूरा रहेगा।

भाजपा ने उठाए गंभीर सवाल

हालांकि, विपक्षी Bharatiya Janata Party ने सरकार के दावों पर सवाल खड़े किए हैं। भाजपा का कहना है कि पेसा कानून को लागू करने की घोषणा तो की गई है, लेकिन इसकी नियमावली, अधिकारों की स्पष्ट परिभाषा और पारंपरिक स्वशासन संस्थाओं की भूमिका पर सरकार अब तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
भाजपा नेताओं का आरोप है कि जब तक मांझी-परगना, मुंडा-मानकी, पाहन और पारंपरिक ग्रामसभा व्यवस्था को विधिवत अधिकार नहीं दिए जाते, तब तक पेसा केवल कागजों तक सीमित रहेगा।

आगे की राह

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच यह साफ है कि पेसा कानून को लेकर झारखंड में बहस तेज हो गई है। जहां सरकार इसे ग्राम स्वराज की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसके व्यावहारिक अमल और पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि पेसा कानून जमीनी स्तर पर कितनी मजबूती से लागू हो पाता है और क्या वास्तव में ग्रामसभा को वह अधिकार मिल पाते हैं, जिनका वादा किया गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *