रांची के पारस एचइसी हॉस्पिटल ने कैंसर इलाज में रचा नया इतिहास

झारखंड/बिहार

रांची स्थित पारस एचइसी हॉस्पिटल ने कैंसर उपचार के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए अत्याधुनिक स्टीरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी (SRS) और स्टीरियोटैक्टिक बॉडी रेडियोथेरेपी (SBRT) सेवाओं की औपचारिक शुरुआत की है। अब तक यह उन्नत तकनीक देश के कुछ चुनिंदा महानगरों के बड़े अस्पतालों तक ही सीमित थी।

अस्पताल में स्थापित आधुनिक हैल्सीअन रेडिएशन मशीन और इमेज-गाइडेड तकनीक एमआरआई व सीटी स्कैन आधारित मिलिमीटर स्तर की सटीकता के साथ ट्यूमर को निशाना बनाती है। इसकी खासियत यह है कि इलाज के दौरान आसपास के स्वस्थ ऊतकों को न्यूनतम नुकसान पहुंचता है।

इसी क्रम में पारस एचइसी हॉस्पिटल ने राज्य में पहली बार दो ब्रेन मेटास्टेसिस मरीजों का इलाज सफलतापूर्वक SRS तकनीक से किया है। यह उपचार पूरी तरह बिना सर्जरी, बिना कट-टांके और न्यूनतम पीड़ा के साथ संपन्न हुआ। इस उपलब्धि को झारखंड में कैंसर और ब्रेन ट्यूमर उपचार के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

अस्पताल के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. निशांत भारद्वाज ने बताया कि SRS तकनीक मस्तिष्क से जुड़ी कई गंभीर बीमारियों में अत्यंत प्रभावी है। इनमें ब्रेन मेटास्टेसिस, मेनिंजियोमा, श्वान्नोमा/एकॉस्टिक न्यूरोमा, एवीएम और ट्राइजेमिनल न्यूराल्जिया शामिल हैं। वहीं SBRT तकनीक शरीर के अन्य अंगों जैसे फेफड़े, लीवर, स्पाइन, प्रोस्टेट और पैंक्रियास के कैंसर के इलाज में कारगर साबित हो रही है।

उन्होंने बताया कि पारंपरिक रेडियोथेरेपी में जहां 25 से 30 सत्रों की आवश्यकता होती है, वहीं SRS और SBRT के माध्यम से केवल एक से पांच सत्रों में इलाज संभव है। इससे मरीजों के समय, खर्च और उपचार से जुड़े जोखिम में उल्लेखनीय कमी आती है। यह तकनीक उन मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिनमें सर्जरी संभव नहीं होती या अत्यधिक जोखिम भरी होती है।

वहीं अस्पताल के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. नितेश कुमार ने कहा कि इस उपलब्धि से झारखंड के मरीजों को अब इलाज के लिए बड़े महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। पारस एचइसी हॉस्पिटल की यह पहल राज्य में कैंसर उपचार को नई दिशा देने के साथ-साथ झारखंड और आसपास के राज्यों के मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर उभरी है।

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