केवल पंजीकृत पेशेवर ही कहलाएंगे “आर्किटेक्ट”: CoA की सख्त चेतावनी.

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फर्जी आर्किटेक्ट्स पर होगी कार्रवाई

रांची। आर्किटेक्ट शब्द के गलत उपयोग को रोकने और जनता को जागरूक करने के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स (IIA) झारखंड चैप्टर की ओर से एक प्रेस वार्ता आयोजित की गई। कार्यक्रम में स्पष्ट किया गया कि भारत में केवल वही व्यक्ति “आर्किटेक्ट” (Architect) की उपाधि का प्रयोग कर सकता है, जो काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर (CoA) में पंजीकृत हो और पंजीकरण संख्या रखता हो।

आर्किटेक्ट्स एक्ट, 1972 के प्रावधान

प्रेस वार्ता में बताया गया कि आर्किटेक्ट्स एक्ट, 1972 की धारा 25 के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को “आर्किटेक्ट” कहलाने हेतु काउंसिल में पंजीकरण कराना अनिवार्य है। वहीं, धारा 37 स्पष्ट रूप से निषेध करती है कि कोई भी अपंजीकृत व्यक्ति “आर्किटेक्ट” शब्द का उपयोग नहीं कर सकता।
फर्जी तरीके से इस उपाधि का प्रयोग कानून का उल्लंघन है और दोषी पाए जाने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है।

फर्म और साझेदारी पर नियम

प्रेस वार्ता में यह भी कहा गया कि यदि कोई साझेदारी फर्म वास्तु सेवाएँ देती है, तो उसके सभी साझेदारों का पंजीकृत आर्किटेक्ट होना आवश्यक है। यदि किसी फर्म में एक भी अपंजीकृत सदस्य है तो ऐसी फर्म अपने नाम में “Architect” शब्द का इस्तेमाल नहीं कर सकती।

न्यायालय और सरकारी आदेशों का हवाला

कार्यक्रम में यह जानकारी दी गई कि दिल्ली उच्च न्यायालय (Council of Architecture बनाम Mukesh Goyal & Ors., 2012) ने साफ निर्णय दिया था कि केवल वही व्यक्ति “आर्किटेक्ट” की उपाधि का उपयोग कर सकता है जो काउंसिल में पंजीकृत हो।
साथ ही, कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) ने भी रजिस्ट्रार ऑफ कम्पनीज़ को निर्देश दिया है कि जब तक किसी कम्पनी या एलएलपी के सभी निदेशक/साझेदार पंजीकृत आर्किटेक्ट न हों, तब तक उनके नाम में “Architect” शब्द की अनुमति न दी जाए।

जनता से अपील

काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर ने आम जनता से अपील की है कि:

1. किसी भी व्यक्ति या फर्म को आर्किटेक्ट मानने से पहले उनकी पंजीकरण स्थिति www.coa.gov.in पर जाँच लें।

2. केवल पंजीकृत आर्किटेक्ट से ही वास्तु योजना, डिज़ाइन और परामर्श सेवाएँ लें।

3. किसी भी तरह के अवैध “Architect” शब्द प्रयोग की जानकारी काउंसिल को दें।

 

कार्यक्रम में शामिल गणमान्य

इस मौके पर मुख्य अतिथि काउंसिल ऑफ आर्किटेक्चर के उपाध्यक्ष वास्तुविद गजानंद राम, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स के चेयरमैन वास्तुविद अतुल सर्राफ, वाइस चेयरमैन अपूर्व मिंज, लीगल एडवाइजर अधिवक्ता विभाष सिंहा, संयुक्त सचिव अनुराग कुमार, कोषाध्यक्ष अमित बारला, वरिष्ठ आर्किटेक्ट अरुण कुमार, गोपी कांत महतो, नितेश नाग, शोभित हांसदा, प्रदीप समीर इक्का, प्रीति विजय, कुमार अभिषेक, अंकित बैरी और देव कुमार जी समेत बड़ी संख्या में आर्किटेक्ट्स मौजूद थे।

उद्देश्य: पेशे की गरिमा और जनहित की रक्षा

प्रेस वार्ता के अंत में यह दोहराया गया कि “आर्किटेक्ट” उपाधि पर नियंत्रण का उद्देश्य किसी का व्यवसाय रोकना नहीं है, बल्कि जनहित की रक्षा, पेशेवर जवाबदेही सुनिश्चित करना और वास्तुकला क्षेत्र के उच्च मानक बनाए रखना है।
फर्जी आर्किटेक्ट्स द्वारा जनता को गुमराह करने और सुरक्षा को जोखिम में डालने की घटनाओं को रोकना ही इस पहल का मुख्य लक्ष्य है।

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