रांची में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती पर “तरंग संगोष्ठी” का आयोजन
मुख्य बिंदु
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हिंदी साहित्य भारती झारखंड के तत्वाधान में ऑनलाइन संगोष्ठी आयोजित
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राष्ट्रकवि दिनकर की रचनाओं और उनके साहित्यिक योगदान पर चर्चा
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दिनकर की कविताओं को राष्ट्रीय चेतना और समाज सुधार के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया
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प्रतिभागियों ने उनके साहित्य से प्रेरणा लेकर आने वाली पीढ़ियों तक संदेश पहुँचाने का संकल्प लिया
रांची में ऑनलाइन संगोष्ठी का आयोजन
रांची, 24 सितंबर 2025- हिंदी साहित्य भारती झारखंड के तत्वाधान में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जयंती के अवसर पर “तरंग संगोष्ठी” का आयोजन गूगल मीट के माध्यम से किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी साहित्य भारती झारखंड के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने की, जबकि संचालन महामंत्री डॉ. सुनीता कुमारी ने किया।


मुख्य अतिथि का संदेश
मुख्य अतिथि के रूप में हिंदी साहित्य भारती (अंतरराष्ट्रीय) के राष्ट्रीय मंत्री एवं झारखंड प्रभारी डॉ. अरुण कुमार सज्जन ने अपने संबोधन में दिनकर की रचनाओं की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राष्ट्रकवि दिनकर केवल कवि ही नहीं, बल्कि चिंतक और समाजद्रष्टा थे, जिन्होंने अपने लेखन से राष्ट्रीय चेतना को जागृत किया।
अध्यक्षीय एवं संचालन संबोधन
श्री अजय राय ने दिनकर की कविताओं को राष्ट्रीय अस्मिता और आत्मगौरव का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को दिनकर के साहित्य से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
महामंत्री डॉ. सुनीता कुमारी ने कहा कि साहित्यकारों का कर्तव्य है कि वे दिनकर की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समाज में मानवीय मूल्यों और राष्ट्रीय भावना का संचार करें।
संगोष्ठी में वक्ताओं के विचार
कार्यक्रम में कई विशिष्ट वक्ताओं ने भाग लिया जिनमें डॉ. संगीता नाथ, बलराम पाठक, अनुज कुमार पाठक, अंकिता कुमारी, मंजू देवी, ऋतु कुमारी, संजय कुमार सिंह, पुष्पा जी, सोनी कुमारी, सुकुमार झा, गंगा प्रसाद और रिंकू दुबे वैष्णवी शामिल थे।
सभी वक्ताओं ने दिनकर की रचनाओं की विभिन्न दृष्टियों से व्याख्या की और उन्हें आधुनिक युग के भी प्रासंगिक कवि बताया। उन्होंने कहा कि दिनकर की कविताएँ जीवन में संघर्ष, साहस और दृढ़ संकल्प बनाए रखने की प्रेरणा देती हैं।
कविताओं का पाठ और जीवन प्रसंग
प्रतिभागियों ने दिनकर की कविताओं का पाठ किया और उनके जीवन के प्रसंग साझा किए। बताया गया कि कैसे उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान साहित्य को हथियार बनाकर राष्ट्रीय एकता और स्वाभिमान को मजबूत किया।
समापन और संकल्प
संगोष्ठी के अंत में सभी प्रतिभागियों ने यह संकल्प लिया कि आने वाली पीढ़ियों तक राष्ट्रकवि दिनकर की कृतियों को पहुँचाने का कार्य निरंतर जारी रहेगा। हिंदी साहित्य भारती झारखंड की ओर से सभी अतिथियों और प्रतिभागियों को धन्यवाद ज्ञापन किया गया।
