मुख्यमंत्री के निर्देश पर मृतक आदिवासी परिवार को ₹50,000 की राहत राशि.

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🟢 मुख्य बिंदु

  • आदिम जनजाति युवक कुशल बृजिया की आंध्र प्रदेश में ट्रेन हादसे में हुई मौत

  • शव लाने तक की आर्थिक स्थिति नहीं थी, परिवार बेहद संकट में

  • युवा नेता शशि पन्ना के ट्वीट पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने लिया संज्ञान

  • श्रम अधीक्षक द्वारा शव लाने के लिए ₹50,000 की आर्थिक सहायता

  • झारखंड से बाहर मजदूरी के लिए जा रहे आदिवासी युवकों की लगातार हो रही दुर्घटनाएं

  • दुरूप पंचायत में ट्रेन हादसे से मौत का यह तीसरा मामला



🔻 दुखद हादसा: मजदूरी की तलाश में निकले युवक की ट्रेन से कटकर मौत

लातेहार जिले के सुदूरवर्ती दुरूप पंचायत के दौना गांव निवासी 30 वर्षीय कुशल बृजिया की ट्रेन हादसे में मौत ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया। वह रोजगार की तलाश में अपने दो साथियों के साथ केरल जा रहा था। रास्ते में आंध्र प्रदेश के चिराला स्टेशन के पास एक दुकान से केला खरीदने उतरा, लेकिन ट्रेन के चल पड़ने के बाद जल्दबाज़ी में चढ़ते वक्त वह फिसल गया और मौके पर ही उसकी मौत हो गई।

🔻 पीछे छूट गया शोकाकुल परिवार

मृतक कुशल के तीन छोटे बच्चे हैं और उसकी मौत ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया। गांव में जैसे ही मौत की खबर पहुंची, शोक की लहर दौड़ गई। आर्थिक स्थिति इतनी खराब थी कि परिजन शव वापस लाने तक में असमर्थ थे।

🔻 शशि पन्ना की सक्रियता से सरकार हरकत में

स्थानीय युवा नेता शशि पन्ना ने इस घटना को लेकर ट्वीट किया, जिसे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गंभीरता से लिया। इसके बाद उन्होंने जिला प्रशासन को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।



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🔻 आर्थिक सहायता से शव गांव लाया गया

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद श्रम अधीक्षक दिनेश भगत द्वारा कुशल के परिजनों के बैंक खाते में ₹50,000 की राशि भेजी गई। इसी आर्थिक सहयोग से शव को गांव लाकर अंतिम संस्कार किया गया।

🔻 लगातार हो रही हैं ऐसी घटनाएं

यह पहली बार नहीं है जब दुरूप पंचायत के किसी आदिवासी युवक की ट्रेन से गिरकर मौत हुई हो। इससे पहले भी नक्कू बुड़स, अजूल बुड़स और नवल बुड़स ऐसे ही हादसों का शिकार हो चुके हैं। यह दर्शाता है कि इलाके में बेहद गंभीर पलायन और गरीबी की स्थिति बनी हुई है।

🔻 सरकारी प्रावधान से मिली मदद

श्रम विभाग के नियमों के अनुसार, राज्य से बाहर काम कर रहे श्रमिक की मौत होने पर, परिजन को शव वापस लाने के लिए ₹50,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। कुशल बृजिया के मामले में इसी प्रावधान के तहत सहायता दी गई।

🔻 पलायन और प्रशासन की भूमिका

यह घटना बताती है कि झारखंड के पिछड़े इलाकों में आदिम जनजातियों के सामने आजीविका के अवसरों का अभाव है, जिससे वे मज़दूरी के लिए दूर राज्यों में जाने को मजबूर हैं। ऐसे समय में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता बेहद आवश्यक है।

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