मुख्य बिंदु:
वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने नियुक्ति प्रक्रिया में विसंगति का उठाया मुद्दा
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पलामू में भर्ती प्रक्रिया पर तत्काल प्रभाव से लगाई रोक
राज्य में चतुर्थवर्गीय नियुक्ति के लिए अब बनेगी नई नियमावली
स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता देने की तैयारी
कैबिनेट के बाद तेज हुई कार्रवाई
गुरुवार को हुई झारखंड कैबिनेट की बैठक के एक दिन बाद ही राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की आपत्ति के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पलामू जिले में चतुर्थवर्गीय पदों की चल रही नियुक्ति प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने का आदेश दिया है।
नियुक्ति प्रक्रिया में सामने आई विसंगति
दरअसल, वित्त मंत्री श्री किशोर ने कैबिनेट बैठक के दौरान यह मुद्दा उठाया कि पलामू जिले में चतुर्थवर्गीय पदों की नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है। उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि इस बार बिना किसी परीक्षा के, केवल शैक्षणिक अंकों के आधार पर बहाली की शर्त रखी गई है, जबकि पूर्व में लिखित परीक्षा के आधार पर ही नियुक्तियां हुई थीं।
बिहार की नियमावली पर झारखंड में बहाली
वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि फिलहाल झारखंड में चतुर्थवर्गीय पदों पर नियुक्ति के लिए कोई पृथक नियमावली नहीं है और वर्तमान बहाली बिहार सरकार की पुरानी नियमावली के आधार पर की जा रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री को स्पष्ट किया कि यह नियमावली झारखंड के युवाओं के हित में नहीं है और राज्य को अपनी स्वयं की नियमावली बनानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने दिए तत्काल रोक के निर्देश
वित्त मंत्री की बातों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि पलामू जिले में फिलहाल चतुर्थवर्गीय पदों की नियुक्ति प्रक्रिया को रोक दिया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही राज्य के हर जिले के स्थानीय युवाओं को रोजगार का अवसर देने वाली स्पष्ट और पारदर्शी नियमावली तैयार की जाएगी।
स्थानीय युवाओं को मिलेगा लाभ
सरकार की इस कार्रवाई से स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि अब चतुर्थवर्गीय पदों पर भर्ती में स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी। राज्य सरकार का मानना है कि बड़ी संख्या में युवा दूसरे राज्यों में रोजगार की तलाश में जाते हैं, ऐसे में अगर स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिले तो यह बड़ी राहत होगी।
