रांची जिले में शिक्षा के क्षेत्र में अहम बदलाव: ‘सीटी बजाओ अभियान 2.0’ और अन्य पहलें
मुख्य बिंदु-
सीटी बजाओ अभियान 2.0: रांची जिले में बच्चों की उपस्थिति बढ़ाने के लिए सीटी बजाने की गतिविधि की गई।
रांची स्पीक्स कार्यक्रम: सरकारी स्कूलों में बच्चों के संवाद कौशल को बेहतर बनाने के लिए शुरू किया गया।
बैक टू स्कूल कैंपेन: 1003 गैर-नामांकित बच्चों को स्कूल में लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया।
सामुदायिक सहभागिता: शिक्षा में समुदाय, अभिभावकों और हितधारकों की बढ़ती भागीदारी।
IDEAL कार्यक्रम: रांची जिले में गतिविधि-आधारित शिक्षा लागू करने का प्रयास।
डिजिटल एकीकरण: स्कूलों में डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू की जा रही है।
शिक्षक प्रशिक्षण: शिक्षकों को गतिविधि-आधारित और समावेशी शिक्षण विधियों में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इन्फ्रास्ट्रक्चर सुधार: स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं में सुधार की योजना बनाई गई है।
निरंतर मॉनिटरिंग: अभियान की नियमित समीक्षा और मूल्यांकन किया जाएगा।
उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री का बयान: ‘सीटी बजाओ अभियान 2.0’ को सामाजिक आंदोलन के रूप में प्रस्तुत किया गया।
रांची जिले में चल रहे समावेशी अभियान रांची जिले में शिक्षा के क्षेत्र में लगातार सुधार हो रहे हैं। इस समय ‘सीटी बजाओ अभियान 2.0’ और ‘बैक टू स्कूल कैम्पेन’ जैसी पहलें प्रभावी रूप से चल रही हैं, जो न केवल बच्चों की उपस्थिति में सुधार कर रही हैं, बल्कि उनके शिक्षा के प्रति रुचि और समुदाय की जागरूकता भी बढ़ा रही हैं।
सीटी बजाओ अभियान की सफलता रांची जिले में ‘सीटी बजाओ अभियान 2.0’ को बड़ी सफलता मिली है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों की दैनिक उपस्थिति में सुधार लाना और स्कूल छोड़ने की दर में कमी लाना है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस अभियान का प्रभाव विशेष रूप से देखा गया है, जहां बच्चों की उपस्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इस पहल से स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में कमी आई है और शिक्षा के प्रति समुदाय की जागरूकता में भी वृद्धि हुई है।
रांची स्पीक्स कार्यक्रम: संवाद कौशल में सुधार डीएसई बादल राज द्वारा शुरू किया गया ‘रांची स्पीक्स’ कार्यक्रम, सरकारी स्कूलों में बच्चों के संचार कौशल को बेहतर बनाने पर केंद्रित है। इस कार्यक्रम में कक्षा 1-5 के बच्चे मध्याह्न भोजन और स्कूल के महत्व पर भाषण देते हैं, जबकि कक्षा 6-8 के बच्चे ‘सीटी बजाओ अभियान’ और अन्य सामाजिक मुद्दों पर भाषण देते हैं। इस कार्यक्रम से बच्चों में आत्मविश्वास और संवाद कौशल में वृद्धि देखी गई है।
‘सीटी बजाओ अभियान’
बैक टू स्कूल कैम्पेन: बच्चों का नामांकन बढ़ाना ‘स्कूल रूआर 2025’ अभियान के तहत 1003 गैर-नामांकित बच्चों को स्कूल में लाने का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान 10 मई 2025 तक चलेगा और इसका उद्देश्य बच्चों को शिक्षा से जोड़ना और उनकी शिक्षा को सुनिश्चित करना है। सामुदायिक सहभागिता को बढ़ाने के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी, शिक्षक, अभिभावक और स्थानीय समुदाय को इस अभियान में शामिल किया गया है।
IDEAL: गतिविधि-आधारित शिक्षा की दिशा में कदम रांची जिले ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत प्राथमिक कक्षाओं में गतिविधि-आधारित शिक्षण को लागू करने का कार्य किया है। इस पहल से बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्याज्ञान में सुधार हो रहा है, जिससे NEP 2020 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिल रही है। रांची जिला इस दिशा में अग्रणी बन चुका है और यह पहल अन्य जिलों के लिए एक उदाहरण बन रही है।
शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार: उपाय और योजनाएं रांची जिले के प्रशासन और शिक्षा विभाग ने ‘सीटी बजाओ अभियान 2.0’ को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कई योजनाएं बनाई हैं। इनमें स्कूलों में डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू करना, शिक्षक प्रशिक्षण में सुधार, स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का सुधार और नियमित मॉनिटरिंग शामिल हैं। इन उपायों के द्वारा शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
समुदाय और अभिभावकों का सहयोग रांची जिले में शिक्षा के सुधार की दिशा में अभिभावकों और समुदाय का सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उपयुक्त कार्यक्रमों और पहलों के द्वारा इन लोगों को शिक्षा की प्रक्रिया में शामिल किया जा रहा है। जिला प्रशासन ने सभी हितधारकों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की है ताकि मिलकर एक शिक्षित और सशक्त झारखंड का निर्माण किया जा सके।
अधिकारियों का संदेश उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, मंजूनाथ भजंत्री ने इस अभियान की महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा, “’सीटी बजाओ अभियान 2.0′ केवल एक अभियान नहीं, बल्कि एक सामाजिक आंदोलन है, जो बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में लाने और उनके भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए समर्पित है।”
रांची जिले का यह प्रयास झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रहा है और इसके तहत सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना जिला प्रशासन का प्रमुख उद्देश्य है.