मुख्य बिंदु:
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हिंडाल्को मुरी के गेट पर हुआ एक दिवसीय अनशन
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विस्थापितों, शोषितों और वंचितों ने दिखाई एकजुटता
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आंदोलनकारियों ने कहा – चार युग बाद फिर से लिखी जा रही इतिहास की गाथा
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हिंडाल्को प्रबंधन को चेतावनी – “Mind it…”
रांची/मुरी | हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, मुरी में विस्थापितों और स्थानीय लोगों के शोषण के खिलाफ मुरी गेट पर एक दिवसीय प्रतीकात्मक अनशन आयोजित किया गया। इस अनशन को इलाके के सैकड़ों विस्थापित, शोषित और वंचित लोगों ने समर्थन दिया। आंदोलनकारी नेताओं ने इसे “ईस्ट इंडिया कंपनी की तरह हो रहे शोषण” के खिलाफ जनता का प्रतिकार बताया।

अनशन स्थल पर उपस्थित लोगों ने कहा कि हिंडाल्को प्रबंधन द्वारा स्थानीय विस्थापितों के साथ वर्षों से अन्याय किया जा रहा है। रोजगार, पुनर्वास और पर्यावरणीय मुआवज़े से जुड़ी मांगों की लगातार अनदेखी की जा रही है।
अनशन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता राजू महतो ने कहा, “हमारे इस आंदोलन को सैकड़ों लोगों का समर्थन मिला है। मैं इस हिम्मत और जज्बे को सलाम करता हूं। यह सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि इतिहास को दोहराने की शुरुआत है। चार युग बाद फिर से जनता अपने अधिकारों के लिए एकजुट हुई है।”
उन्होंने हिंडाल्को प्रबंधन को सीधी चेतावनी दी कि इस आंदोलन को हल्के में न लें। “Hindalco प्रबंधन इसका भी स्क्रीनशॉट लेकर अपने कार्यालय में रख लेना… Mind it!”
आंदोलन के दौरान उपस्थित लोगों ने “इंकलाब ज़िंदाबाद”, “विस्थापितों को न्याय दो” और “शोषण बंद करो” जैसे नारे लगाए।
अनशनकारियों का कहना है कि अगर हिंडाल्को प्रबंधन ने उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो यह आंदोलन आगे और व्यापक रूप लेगा।
