पूर्णिया नरसंहार पर भड़के झारखंड के मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, कहा – “यह आदिवासी अस्मिता पर सीधा हमला”
मुख्य बिंदु:
-
बिहार के पूर्णिया में पांच आदिवासियों को ज़िंदा जलाने की घटना से देश स्तब्ध
-
झारखंड के मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सोशल मीडिया पर जताई कड़ी नाराज़गी
-
भाजपा शासित बिहार में आदिवासियों की सुरक्षा पर उठाए गंभीर सवाल
-
झारखंड सरकार से उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजने की मांग
-
आदिवासी अस्मिता, अस्तित्व और आत्म-सम्मान से जुड़ा बताया मामला
रांची/पूर्णिया, 8 जुलाई 2025
बिहार के पूर्णिया ज़िले में आदिवासी समुदाय के पांच लोगों की जिंदा जलाकर हत्या कर दिए जाने की घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। इस निर्मम कांड को लेकर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने गहरी नाराजगी जताई है और इसे मानवता पर कलंक करार दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से इस हृदयविदारक घटना पर तीखी प्रतिक्रिया दी।
“यह केवल हत्या नहीं, आदिवासी अस्मिता का अपमान है”
डॉ. अंसारी ने कहा कि यह घटना केवल एक अपराध नहीं, बल्कि हमारे आदिवासी समाज के अस्तित्व और आत्म-सम्मान पर सीधा हमला है। उन्होंने लिखा, “मैं इस हृदयविदारक घटना की घोर निंदा करता हूँ और इससे अत्यंत आहत हूँ। भाजपा शासित बिहार में आदिवासी समाज पूरी तरह असुरक्षित है।”
झारखंड पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष बने जानकी यादव, मिथिलेश ठाकुर ने दी बधाई.
झारखंड सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग
स्वास्थ्य मंत्री ने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि झारखंड सरकार को एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का गठन करना चाहिए जिसमें उन्हें भी शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि वे मौके पर जाकर पीड़ित परिवारों से मिलना चाहते हैं और सच्चाई को सामने लाना चाहते हैं।
केंद्र और बिहार सरकार पर बने दबाव
डॉ. अंसारी ने यह भी कहा कि झारखंड सरकार को चाहिए कि वह इस निर्मम हत्याकांड की निष्पक्ष जांच और दोषियों को कठोरतम सज़ा दिलाने के लिए केंद्र और बिहार सरकार पर दबाव बनाए। उन्होंने कहा, “यह केवल राजनीतिक या प्रशासनिक मामला नहीं है, बल्कि यह हमारे आदिवासी समाज के अस्तित्व और न्याय की लड़ाई है।”
सोशल मीडिया पर उबाल
स्वास्थ्य मंत्री के बयान के बाद सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कई संगठनों ने भी इस घटना को मानवाधिकार का उल्लंघन बताते हुए जांच की मांग की है।
राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल
यह मामला अब सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं रहा। झारखंड समेत कई राज्यों के आदिवासी संगठन, राजनीतिक दल और सामाजिक कार्यकर्ता इसे एक राष्ट्रीय संकट के रूप में देख रहे हैं। जानकारों का मानना है कि अगर जल्द ही कार्रवाई नहीं हुई तो यह मुद्दा और व्यापक रूप ले सकता है।
