धरती आबा बिरसा मुंडा की 125वीं पुण्यतिथि पर राज्यपाल को सौंपा गया स्थानीय नीति का प्रारूप
देवेंद्रनाथ महतो के नेतृत्व में नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने की मुलाकात, कहा– 25 साल बाद भी अधूरा है अबुआ राज का सपना
मुख्य बिंदु:
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बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर कोकर समाधि स्थल पर माल्यार्पण किया गया
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झारखंडी जनभावना के अनुरूप स्थानीय और नियोजन नीति का प्रारूप राज्यपाल को सौंपा
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देवेंद्रनाथ महतो ने कहा– केवल माला नहीं, सपनों को साकार करना जरूरी
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25 वर्षों में भी राज्य में स्थानीयता नीति नहीं बनी, झारखंडियों की पहचान पर संकट
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राज्यपाल ने कहा– जनभावना का होगा सम्मान, विधेयक राष्ट्रपति भवन भेजा जा चुका
125वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि और राजनीतिक पहल
रांची– धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 125वीं पुण्यतिथि के अवसर पर कोकर समाधि स्थल पर माल्यार्पण करते हुए जेएलकेएम केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेंद्रनाथ महतो ने झारखंड की अधूरी नीति व्यवस्था पर चिंता जताई। मौके पर नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल संतोष गंगवार से मुलाकात कर स्थानीयता और नियोजन नीति का प्रारूप सौंपा।
‘अबुआ दिशुम अबुआ राज’ का सपना अधूरा: महतो
देवेंद्रनाथ महतो ने कहा कि बिरसा मुंडा के नाम पर सिर्फ माल्यार्पण करने से कुछ नहीं होगा, उनके सपनों को साकार करना होगा। उन्होंने याद दिलाया कि 15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य का गठन हुआ था, लेकिन 25 वर्षों में स्थानीयता और नियोजन नीति अब तक स्पष्ट नहीं हो पाई है। इसका सीधा असर झारखंडी पहचान, अधिकार और अस्मिता पर पड़ रहा है।
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स्थानीय नीति पर पिछली सरकारों की नाकामी
महतो ने राज्यपाल को बताया कि अब तक बनी हर सरकार ने स्थानीयता नीति को या तो अटकाया, लटकाया या भटकाया। चाहे वह बाबूलाल मरांडी की 2002 की नीति हो, हेमंत सोरेन या रघुवर दास की सरकारें, सभी ने या तो कमेटियाँ बनाईं या विवादास्पद कट-ऑफ वर्ष तय किया लेकिन समाधान नहीं निकाला।
उन्होंने बताया कि 2002, 2010, 2013, 2016 और 2022 में अलग-अलग स्तरों पर प्रयास हुए, परंतु या तो हाईकोर्ट ने नीति खारिज की या विधेयक ठंडे बस्ते में चला गया।
राज्यपाल से की ठोस पहल की मांग
राज्यपाल को सौंपे गए ज्ञापन में मांग की गई कि—
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बिहार पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 85 के तहत झारखंड में 1982 के श्रम नियोजन विभाग के गजट को संशोधन के साथ अंगीकृत किया जाए।
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डॉ. रामदयाल मुंडा रिपोर्ट के अनुसार जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं को आधार बनाकर स्थानीय और नियोजन नीति लागू की जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने यह भी बताया कि इस मांग के समर्थन में राज्य भर में आंदोलन, बंद, धरना और पदयात्रा किए गए हैं। हाल ही में दुमका से रांची तक पदयात्रा कर 5 जून को राजभवन के सामने प्रदर्शन किया गया था।
राज्यपाल का आश्वासन: जनभावना का होगा सम्मान
राज्यपाल संतोष गंगवार ने प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के दौरान कहा कि वे झारखंडी जनभावना का सम्मान करते हैं। उन्होंने जानकारी दी कि 1932 खतियान आधारित स्थानीय नीति विधेयक को राष्ट्रपति भवन भेजा जा चुका है।
प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन रहे शामिल
देवेंद्रनाथ महतो के नेतृत्व में मिले नौ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में अमित मंडल, संजय महतो, योगेश भारती, प्रेम नायक, रणधीर यादव, सिकंदर आलम, मनीष और रविन्द्र कुमार शामिल थे।
