16 मार्च 2012: जब सचिन ने पूरा किया शतकों का शतक।

झारखंड/बिहार राष्ट्रीय ख़बर

आज का महत्व

आज वर्तमान है, कल अतीत बन जाता है और आने वाला कल भविष्य कहलाता है। अतीत या इतिहास ज्ञानवर्धन का साधन है, जो वर्तमान को दृष्टि और भविष्य को दिशा देता है। इसी कड़ी में, हम आपको 16 मार्च के ऐतिहासिक महत्व से अवगत करा रहे हैं।

सचिन तेंदुलकर का शतकों का शतक

16 मार्च 2012 को क्रिकेट के मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर ने एकदिवसीय क्रिकेट में अपना 49वां शतक पूरा किया। इससे पहले, वह टेस्ट क्रिकेट में 51 शतक बना चुके थे। इस तरह, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 100 शतक लगाने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। सचिन तेंदुलकर, जो भारत रत्न से सम्मानित हैं, यह कीर्तिमान रचने वाले दुनिया के पहले और अब तक के एकमात्र बल्लेबाज हैं।

इतिहास की प्रमुख घटनाएं

  • 1527 – बाबर ने खानवा के युद्ध में राणा सांगा को हराया।
  • 1693 – इंदौर के होल्कर वंश के संस्थापक मल्हारराव होलकर का जन्म।
  • 1846 – प्रथम अंग्रेज-सिख युद्ध के बाद अमृतसर संधि पर हस्ताक्षर।
  • 1901 – स्वतंत्रता सेनानी पी श्रीरामुलु का जन्म।
  • 1910 – इफ्तिखार अली खान पटौदी का जन्म, जिन्होंने भारत और इंग्लैंड दोनों के लिए क्रिकेट खेला।
  • 2000 – पाकिस्तान में बच्चों के कातिल जावेद इकबाल को अदालत ने मौत की सजा सुनाई।
  • 2014 – क्रीमिया में यूक्रेन से अलग होकर रूस में विलय के लिए जनमत संग्रह हुआ।
  • 2024 – कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत जोड़ो न्याय यात्रा का समापन किया।

आज जन्मे प्रसिद्ध व्यक्ति

  • 1958 – बिपिन रावत, भारत के पहले चीफ़ ऑफ़ डिफ़ेंस स्टाफ़।
  • 1956 – तनुश्री शंकर, भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना।
  • 1938 – अली मानिकफ़ान, भारतीय समुद्री शोधकर्ता और इकोलॉजिस्ट।
  • 1693 – मल्हारराव होल्कर, इंदौर के होल्कर वंश के संस्थापक।
  • 1901 – पी. श्रीरामुलु, स्वतंत्रता सेनानी।
  • 1906 – अंबिका प्रसाद दिव्य, हिंदी साहित्यकार।

आज के दिन हुए निधन

  • 1963 – एम. पी. शास्त्री, भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश।
  • 1947 – अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’, प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार।
  • 1955 – विजयानंद त्रिपाठी, प्रसिद्ध हिंदी साहित्यकार।

महत्वपूर्ण दिवस

नेशनल वैक्सीनेशन डे – यह दिन भारत में टीकाकरण के महत्व को रेखांकित करने के लिए मनाया जाता है।

निष्कर्ष

इतिहास सिर्फ घटनाओं का संकलन नहीं, बल्कि सीखने और भविष्य को दिशा देने का माध्यम भी है। 16 मार्च को हुई ऐतिहासिक घटनाएं हमें कई प्रेरणाएँ देती हैं—चाहे वह खेल हो, राजनीति हो या समाज सुधार।

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